Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की सरकार इन दिनों एक गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है। इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए सुक्खू सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मुख्य सचिव सहित तमाम बड़े अधिकारियों के वेतन को रोकने का आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री से लेकर सभी मंत्रियों और विधायकों की सैलरी को भी अगले छह महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस फैसले से पूरे राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
बड़े अधिकारियों और नेताओं के वेतन पर भारी कैंची
राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की सैलरी अब पूरी नहीं मिलेगी। मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारियों का तीस प्रतिशत वेतन अब अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा। इसके अलावा अन्य अधिकारियों के वेतन में भी बीस प्रतिशत की कटौती की गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी आधी सैलरी यानी पचास प्रतिशत हिस्सा नहीं लेंगे। वहीं उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष का तीस प्रतिशत वेतन भी रोका जाएगा।
छह महीने तक लागू रहेगी वेतन स्थगन की नई व्यवस्था
हिमाचल सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कटौती केवल अगले छह माह के लिए ही लागू रहेगी। यह नई व्यवस्था अप्रैल दो हजार छब्बीस के वेतन से प्रभावी हो जाएगी। अधिकारियों और नेताओं को मई महीने में कटकर वेतन मिलेगा। सरकार ने यह अहम कदम राज्य की कमजोर होती आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए उठाया है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने राज्यपाल की अंतिम मंजूरी के बाद इस पूरी व्यवस्था की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
कटौती के बाद किसको मिलेगी कितनी सैलरी?
सरकार की नई अधिसूचना के बाद सभी वरिष्ठ पदों के वेतन का गणित बदल गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू को अब एक लाख सत्तर हजार रुपये मासिक वेतन मिलेगा। कैबिनेट मंत्रियों को कटौती के बाद दो लाख चौबीस हजार रुपये मिलेंगे। विधानसभा अध्यक्ष को भी दो लाख चौबीस हजार रुपये ही दिए जाएंगे। विधानसभा उपाध्यक्ष को दो लाख बाइस हजार रुपये मिलेंगे। प्रत्येक विधायक का बीस प्रतिशत वेतन कटेगा और उन्हें दो लाख छत्तीस हजार रुपये मिलेंगे।
अधिकारियों के वेतन से हर महीने कटेंगे लाखों रुपये
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सैलरी में भी भारी कमी आने वाली है। मुख्य सचिव के वेतन से हर महीने एक लाख दस हजार रुपये की कटौती होगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव की सैलरी से एक लाख पांच हजार रुपये रोके जाएंगे। इसी तरह प्रधान सचिव के वेतन से सतानवे हजार पांच सौ रुपये स्थगित होंगे। सचिव स्तर के अधिकारियों को हर महीने साठ हजार रुपये कम मिलेंगे। सरकार ने साफ किया है कि यह केवल अस्थायी रोक है।
लोन लेने वाले अधिकारियों को दी गई बड़ी राहत
राज्य सरकार ने लोन चुकाने वाले अधिकारियों को इस नए नियम में थोड़ी राहत प्रदान की है। जिन अधिकारियों ने बैंक से लोन लिया हुआ है, वे इसके लिए लिखित आवेदन कर सकते हैं। सरकार उनकी सैलरी से पहले लोन की किश्त या ईएमआई काटेगी। उसके बाद जो शेष राशि बचेगी, उस पर ही कटौती का यह नियम लागू किया जाएगा। इसके अलावा कर्मचारियों के ई-सैलरी सिस्टम और पे-स्लिप में रोकी गई राशि का पूरा ब्यौरा साफ दिखेगा।
केंद्र द्वारा अनुदान रोकने से बिगड़े राज्य के हालात
राज्य सरकार के अनुसार यह संकट केंद्र सरकार द्वारा अनुदान रोकने के कारण पैदा हुआ है। केंद्र सरकार ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को पूरी तरह बंद कर दिया है। सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद इस फैसले से हिमाचल को भारी नुकसान हो रहा है। राज्य को हर साल आठ से दस हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह अनुदान राज्य के सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के लिए जरूरी था।
एक लाख करोड़ से ज्यादा के भारी कर्ज में डूबा प्रदेश
हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पहले से ही बेहद चिंताजनक बनी हुई है। राज्य पर वर्तमान में एक लाख करोड़ रुपये से भी अधिक का भारी कर्ज मौजूद है। राज्य के कुल बजट का बारह प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा केंद्र के अनुदान से ही आता था। इस फंड के अचानक बंद होने से विकास कार्य भी पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र के इस कदम को राज्य की आम जनता के साथ बड़ा अन्याय बताया है।
चुनावी गारंटियों ने बढ़ा दिया सरकारी खजाने पर भारी बोझ
विपक्षी दलों और कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस संकट का मुख्य कारण मुफ्त की योजनाएं हैं। कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव जीतने के लिए जनता को कई बड़े वादे किए थे। इन चुनावी वादों को पूरा करने में सरकारी खजाना पूरी तरह खाली हो गया है। पुरानी पेंशन योजना की बहाली और महिलाओं को आर्थिक सहायता देने से बजट बहुत ज्यादा बिगड़ गया है। आपदा राहत पैकेज ने भी राज्य के सीमित संसाधनों पर काफी गहरा प्रभाव डाला है।
सरकार की प्रमुख दस गारंटियों का सीधा आर्थिक असर
राज्य में सरकारी योजनाओं का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर देखा जा रहा है। सरकार इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
- नारी शक्ति योजना के तहत महिलाओं को पंद्रह सौ रुपये।
- पुरानी पेंशन योजना के तहत रिटायर कर्मचारियों को बड़ी राहत।
- किसानों से दो रुपये किलो गोबर की सीधी खरीद।
- प्रदेश के सभी परिवारों को तीन सौ यूनिट मुफ्त बिजली।
- युवाओं के लिए छह सौ अस्सी करोड़ का विशेष स्टार्टअप फंड।
मुख्यमंत्री का दावा, आम जनता पर नहीं पड़ेगा कोई असर
इन तमाम चुनौतियों के बीच मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को आश्वस्त किया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस आर्थिक संकट का असर मध्यम वर्ग पर बिल्कुल नहीं पड़ने दिया जाएगा। यह वेतन स्थगन केवल व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए किया गया है। आने वाले महीनों में राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की पूरी उम्मीद है। जैसे ही राज्य का खजाना भरेगा, सभी जनप्रतिनिधियों और बड़े अधिकारियों को उनकी रोकी गई सैलरी मिलेगी।
विपक्ष ने बोला हमला, राज्य को दिवालिया बनाने का आरोप
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की गलत नीतियों ने हिमाचल को आर्थिक दिवालियापन के कगार पर ला खड़ा किया है। राज्य में विकास के सभी जरूरी कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। वर्तमान सरकार अपने कर्मचारियों को पुराना एरियर और महंगाई भत्ता तक नहीं दे पा रही है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि वेतन रोकना कोई स्थायी समाधान नहीं है और सरकार विफल है।
भविष्य की सरकारों पर पड़ेगा भारी और गंभीर आर्थिक बोझ
विपक्षी नेताओं का दावा है कि यह सरकार अपनी वित्तीय बदहाली का सारा बोझ भविष्य पर डाल रही है। आज वेतन रोकने का मतलब है कि आने वाली सरकारों को इसे ब्याज सहित चुकाना पड़ेगा। इससे राज्य के आर्थिक ढांचे पर और भी ज्यादा दबाव बढ़ेगा। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार राज्य को अपनी आमदनी के नए साधन तलाशने होंगे। केवल वेतन काटने से एक लाख करोड़ के भारी कर्ज और बढ़ते खर्चों को संभाला नहीं जा सकता है।
