Women’s Health News: गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का खिसकना (Uterine Prolapse) एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत गंभीर चिकित्सा स्थिति है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां और लिगामेंट्स कमजोर हो जाते हैं, तो वे बढ़ते हुए गर्भाशय का भार नहीं संभाल पाते। इसके परिणामस्वरूप गर्भाशय योनि मार्ग की ओर नीचे खिसकने लगता है। ‘मम्माज ब्लेसिंग आईवीएफ’ की मेडिकल डायरेक्टर के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं को इस स्थिति के प्रति सतर्क रहना चाहिए ताकि समय रहते गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके।
मूत्र मार्ग से जुड़ी जटिलताएं
पेल्विक एरिया कमजोर होने से पेशाब को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। जब गर्भाशय अपनी जगह से नीचे आता है, तो यह मूत्राशय पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसके कारण गर्भवती महिलाओं को बार-बार पेशाब आना, पेशाब रोकने में असमर्थता या पूरी तरह से पेशाब रुक जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये लक्षण न केवल असुविधाजनक हैं, बल्कि गुर्दों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकते हैं।
प्रीटर्म डिलीवरी और गर्भपात का खतरा
गर्भाशय के खिसकने से गर्भावस्था के सुरक्षित रहने पर बड़ा खतरा मंडराने लगता है। इस स्थिति में समय से पहले प्रसव पीड़ा (Preterm Labor) शुरू होने या भ्रूण की सुरक्षात्मक झिल्ली टूटने की संभावना बढ़ जाती है। यदि गर्भाशय का सपोर्ट सिस्टम पूरी तरह जवाब दे दे, तो यह गर्भपात (Miscarriage) का कारण भी बन सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना माँ और शिशु दोनों के लिए घातक हो सकता है।
सर्विक्स में सूजन और घाव की समस्या
जब गर्भाशय नीचे खिसकता है, तो सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) में सूजन आ सकती है या गहरे घाव विकसित हो सकते हैं। विशेष रूप से यदि गर्भाशय योनि से बाहर निकल आए, तो बाहरी घर्षण के कारण ऊतकों को चोट पहुँच सकती है। यह स्थिति शिशु की प्राकृतिक मूवमेंट में बाधा डालती है और प्रसव के दौरान गंभीर रुकावटें पैदा कर सकती है। इसके उपचार के लिए तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।
संक्रमण और सेप्सिस का बढ़ा जोखिम
नीचे खिसके हुए गर्भाशय के ऊतक हवा और बाहरी बैक्टीरिया के सीधे संपर्क में आ जाते हैं। इससे ‘कोरियोअम्नियोनाइटिस’ (भ्रूण की झिल्ली का संक्रमण) और ‘यूटीआई’ (यूरिन इन्फेक्शन) जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह संक्रमण रक्त में फैलकर ‘सेप्सिस’ का रूप ले सकता है, जो जानलेवा साबित होता है। व्यक्तिगत स्वच्छता और पेल्विक एक्सरसाइज के माध्यम से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


