Islamabad News: पाकिस्तान सरकार ने चीन को गधे के मांस के निर्यात (Donkey Meat Export) के लिए आखिरकार हरी झंडी दे दी है। यह फैसला एक चीनी कंपनी द्वारा अपना कामकाज बंद करने की कड़ी चेतावनी के बाद लिया गया है। दरअसल, ग्वादर स्थित ‘हैंगेंग ट्रेड कंपनी’ के निर्यात लाइसेंस को मंजूरी मिलने में देरी हो रही थी, जिससे चीनी निवेश पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। अंततः मामले की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को इस विवाद में सीधा हस्तक्षेप करना पड़ा।
नौकरशाही की सुस्ती और चीनी कंपनी की चेतावनी
ग्वादर में परिचालन कर रही हैंगेंग ट्रेड कंपनी ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि नौकरशाही की अड़चनों के कारण निर्यात में देरी जारी रही, तो वह पाकिस्तान में अपना निवेश और परिचालन पूरी तरह बंद कर देगी। इस धमकी ने पाकिस्तान में विदेशी समर्थित परियोजनाओं को मिलने वाली सरकारी सहायता और प्रशासनिक कठिनाइयों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के दखल के बाद अब इस कंपनी के लिए रास्ते साफ हो गए हैं, जिससे पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा मिलने की उम्मीद है।
शहबाज शरीफ की चीन यात्रा से पहले बड़ा फैसला
सरकार का यह निर्णय सामरिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समय पर आया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस महीने के अंत में एक बड़े निवेश मंच (Investment Forum) में हिस्सा लेने के लिए चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। जानकारों का मानना है कि यात्रा से पहले चीनी कंपनी के विवाद को सुलझाकर पाकिस्तान यह संदेश देना चाहता है कि वह चीनी निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूती प्रदान कर सकता है।
चीन में गधे के मांस और चमड़े की भारी मांग
हैंगेंग ट्रेड कंपनी ग्वादर में एक अत्याधुनिक बूचड़खाना संचालित करती है, जहां से गधे का मांस और चमड़ा सीधे चीन भेजा जाता है। चीन में इन उत्पादों की अत्यधिक मांग है, विशेष रूप से पारंपरिक औषधि ‘इजियाओ’ (Ejiao) बनाने के लिए। इस औषधि का उपयोग चीन में रक्तवर्धक दवाओं और त्वचा संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। पाकिस्तान में बड़ी संख्या में मौजूद गधों की आबादी को देखते हुए चीन इसे एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा है।
आर्थिक संकट के बीच निर्यात का सहारा
गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए गधों का निर्यात कमाई का एक नया जरिया बन गया है। पाकिस्तान में गधों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी है और चीन इस बाजार का सबसे बड़ा खरीदार है। हालांकि, शुरुआत में इस प्रस्ताव का विरोध हुआ था, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार में आई भारी कमी और चीनी दबाव के चलते सरकार को इस व्यापारिक समझौते पर मुहर लगानी पड़ी। अब देखना यह होगा कि इस फैसले का पाकिस्तान की घरेलू अर्थव्यवस्था और पशुधन पर क्या असर पड़ता है।


