ईरान के शीर्ष नेतृत्व में गहराती दरार: क्या ढहने की कगार पर है इस्लामिक गणराज्य?

International News: ईरान और अमेरिका के बीच जारी शांति वार्ता में आए गतिरोध के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के शीर्ष नेतृत्व के भीतर आंतरिक मतभेद और दरारें पहले से कहीं ज्यादा गहरी और चौड़ी होती जा रही हैं। यह स्थिति ऐसे समय में पैदा हुई है जब ईरान अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। विशेषज्ञों के बीच अब यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि वास्तव में ईरान की सत्ता की कमान किसके हाथों में है।

अमेरिकी थिंक टैंक का बड़ा दावा

वाशिंगटन स्थित ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ (ISW) ने बुधवार को अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में ईरान की शासन प्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। थिंक टैंक के अनुसार, 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पिछले 47 वर्षों में विकसित हुई ईरान की सत्ता संरचना अब गहरे तनाव के स्पष्ट संकेत दे रही है। गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक संकट, आंतरिक गुटबाजी और बढ़ते जनाक्रोश ने ईरान के विभिन्न राजनीतिक गुटों के बीच टकराव को सार्वजनिक कर दिया है।

कट्टरपंथियों और यथार्थवादियों के बीच सत्ता संघर्ष

ईरान के भीतर वफादारी की जांच, जासूसी के दावों और विद्रोह की धमकियों ने सत्ताधारी वर्ग के बीच के असंतुलन को उजागर किया है। एक तरफ आईआरजीसी कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी जैसे धुर कट्टरपंथी गुट हैं, जो सख्त नीतियों के पक्षधर हैं। दूसरी तरफ राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबफ जैसे ‘यथार्थवादी’ नेता हैं, जो मौजूदा अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को देखते हुए कुछ लचीला रुख अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख और ईरान की स्थिति

नेतृत्व के बीच यह खींचतान तब और स्पष्ट हो गई जब तेहरान ने युद्ध समाप्त करने का एक नया प्रस्ताव पेश किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ‘अपर्याप्त’ बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पतन के कगार पर खड़ा है और अपनी नेतृत्व स्थिति को बचाने के लिए छटपटा रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जल्द से जल्द व्यापार के लिए खोला जाए।

भविष्य की अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय दबाव

ईरान के भीतर उपजे इस आंतरिक संकट ने न केवल उसकी घरेलू राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि पश्चिम एशिया के समीकरणों को भी बदल दिया है। यदि शीर्ष नेतृत्व में यह दरार इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले समय में ईरान की शासन प्रणाली में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता इस आंतरिक कलह को शांत कर पाने में सफल होंगे या स्थिति बेकाबू हो जाएगी।

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