Health News: महाराष्ट्र में इस साल अप्रैल के महीने में ही भीषण गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य में पिछले तीन दिनों से लगातार हीटवेव का अलर्ट जारी है और आसमान से आग बरसने के आसार हैं। इस बीच अहिल्यानगर जिले के धवलपुरी गांव में खेत पर काम कर रही एक 45 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। वहीं राज्य में मार्च से अब तक हीटवेव के 31 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
हर्षदा चौधरी नामक यह महिला बीते सप्ताह दोपहर के समय अपने खेत में पशुओं के लिए चारा काट रही थी। अचानक तबीयत बिगड़ने पर वह वहीं गिर पड़ीं। परिजन तुरंत उन्हें उपचार के लिए नजदीकी ग्रामीण अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। स्थानीय प्रशासन ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से होगा खुलासा, स्वास्थ्य विभाग ने मामले को माना संदिग्ध
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने महिला की मौत को लेकर फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। स्वास्थ्य सेवाओं के संयुक्त निदेशक डॉ. संदीप सांगले ने स्पष्ट किया कि इस मृत्यु को अभी संदिग्ध श्रेणी में ही रखा गया है। उन्होंने बताया कि एक विशेषज्ञ समिति मौत के कारणों की गहन जांच करती है। यह समिति ही तय करेगी कि महिला की जान लू लगने यानी हीटस्ट्रोक के कारण गई या फिर मौत के पीछे कोई अन्य आंतरिक बीमारी जिम्मेदार थी। विभाग ने जिला अस्पताल से इस मामले से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज मंगवा लिए हैं।
डॉ. सांगले के अनुसार जब तक पोस्टमॉर्टम की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। बावजूद इसके, इस घटना ने राज्य में बढ़ते तापमान और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर चिंता की लकीरें और गहरी कर दी हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे तेज धूप में बिना जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलें और अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
अकोला जिला हीटवेव की चपेट में सबसे आगे, आंकड़ों ने बढ़ाई टेंशन
राज्य स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़े बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। एक मार्च से लेकर उन्नीस अप्रैल के बीच महाराष्ट्र में हीटवेव के कुल 31 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित अकोला जिला रहा है जहां लू के सात मरीज दर्ज किए गए। इसके बाद नंदुरबार में पांच और रत्नागिरी में चार मामले सामने आए हैं। गढ़चिरौली, जालना, पालघर, रायगढ़ और सतारा जैसे जिलों में भी दो-दो मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
इसके अतिरिक्त गोंदिया, जलगांव, नासिक, पुणे और ठाणे जिलों से भी हीटवेव के एक-एक मामले की पुष्टि हुई है। पिछले दो दिनों से अमरावती में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। राज्य के कम से कम 15 मौसम केंद्रों पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। इस भीषण गर्मी के चलते आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है।
मौसम विभाग की राहत भरी खबर, आज से बदलेगा मौसम का मिजाज
भीषण गर्मी से परेशान महाराष्ट्र के लोगों के लिए भारतीय मौसम विभाग एक राहत भरी खबर लेकर आया है। आईएमडी के ताजा अपडेट के मुताबिक आज बुधवार से राज्य के मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। विभाग ने मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र और कोंकण के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। अनुमान है कि अगले तीन दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस बदलाव से तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मुंबई में बुधवार को अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उससे सटे ठाणे जिले में आज और कल हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि विभाग ने लोगों को अभी भी सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि उमस भरी गर्मी से परेशानी बढ़ सकती है।
हीटस्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी, डॉक्टर ने बताए बचाव के जरूरी उपाय
बढ़ते तापमान के बीच वरिष्ठ चिकित्सकों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रवि पांडे ने बताया कि हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का आंतरिक तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट या उससे अधिक हो जाता है। इस स्थिति में शरीर स्वयं को ठंडा रखने की प्राकृतिक क्षमता खो देता है। उन्होंने इसे एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी करार देते हुए कहा कि इससे बचने का सबसे कारगर तरीका रोकथाम ही है। अत्यधिक गर्मी में पसीना आना बंद हो जाने पर आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।
डॉ. पांडे के अनुसार शरीर में पानी और नमक की अत्यधिक कमी को पूरा करने के लिए प्यास न लगने पर भी नियमित रूप से पानी पीते रहना चाहिए। इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने के लिए नींबू पानी, ओआरएस का घोल, नारियल पानी या छाछ का सेवन बेहद फायदेमंद होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि दोपहर बारह बजे से शाम चार बजे के बीच तेज धूप में घर से बाहर निकलने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इस समयावधि में सूर्य की किरणें सबसे अधिक तीव्र और हानिकारक होती हैं।
खानपान और पहनावे में बरतें ये खास सावधानियां
चिकित्सकों ने भीषण गर्मी में पहनावे और खानपान को लेकर भी अहम दिशानिर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सिंथेटिक कपड़ों की बजाय हल्के रंग के ढीले-ढाले और सूती वस्त्र पहनने की सलाह दी है। सिंथेटिक कपड़े पसीने को नहीं सोख पाते जिसके कारण शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। यदि किसी कारणवश धूप में निकलना आवश्यक हो तो छाते का प्रयोग करें या सिर को सूती कपड़े या टोपी से अच्छी तरह ढक लें। आंखों की सुरक्षा के लिए धूप के चश्मे का इस्तेमाल करना न भूलें।
विशेषज्ञों ने अपने दैनिक आहार में कच्चे प्याज को शामिल करने पर जोर दिया है। कच्चा प्याज लू से बचाने में अत्यंत कारगर माना जाता है। इसके अलावा तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे जलयुक्त फलों का सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करें। शरीर में पानी की कमी करने वाले पेय पदार्थों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है। चाय, कॉफी और शराब शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं इसलिए गर्मी के मौसम में इनका सेवन न्यूनतम करना ही बेहतर विकल्प है।
