Himachal News: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े को लेकर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। एसडीएम सदर डॉ. राजदीप सिंह के नेतृत्व वाली जांच टीम ने पिछले छह वर्षों के रिकॉर्ड खंगालने के बाद 500 वाहनों को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह कदम पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के बाद उठाया गया है। अब इन सभी वाहन मालिकों को अपने दस्तावेजों और गाड़ी के साथ दोबारा सत्यापन के लिए कार्यालय तलब किया गया है।
छह साल के रिकॉर्ड में मिला फर्जीवाड़े का जाल
प्रशासनिक जांच टीम ने 1 जनवरी 2020 से दिसंबर 2025 तक के सभी वाहन पंजीकरणों की गहनता से पड़ताल की है। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपित गौरव सिंह और सुभाष ने अपने कार्यकाल का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड आरएलए को नहीं सौंपा है। इन अधिकारियों को रिकॉर्ड पेश करने के लिए कई नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उनके असहयोग के कारण सैकड़ों फाइलों में खामियां मिलीं। फर्जी तरीके से पंजीकृत इन वाहनों के मालिकों को अब कानूनी नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
दिल्ली क्राइम ब्रांच की एंट्री से खुला था मामला
इस पूरे घोटाले की परतें इस साल जनवरी में खुलनी शुरू हुई थीं, जब दिल्ली के चाणक्यपुरी में एक गाड़ी चोरी की एफआईआर दर्ज हुई थी। जांच के दौरान दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम बिलासपुर पहुंची और यहां तैनात सीनियर असिस्टेंट सुभाष चंद को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि यह गिरोह बाहरी राज्यों से पुरानी और चोरी की गाड़ियां मंगवाता था। इसके बाद नकली दस्तावेजों और फर्जी चेसिस नंबरों के आधार पर उन्हें बिलासपुर में नई गाड़ियों के रूप में पंजीकृत कर दिया जाता था।
कमीशन के खेल में सरकारी खजाने को भारी चपत
फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले आरोपित गाड़ियों की कीमत के आधार पर मोटा कमीशन और रिश्वत वसूलते थे। यह पूरा नेटवर्क इतना संगठित था कि आरोपित फर्जी पंजीकरण से मिली कमाई के दम पर आलीशान जीवन जी रहे थे और भारत भ्रमण पर निकलते थे। अब प्रशासन ने उन सभी वाहन मालिकों पर शिकंजा कसा है जिन्होंने शॉर्टकट के चक्कर में इन बिचौलियों की मदद ली थी। आरएलए बिलासपुर अब राज्य परिवहन प्राधिकरण को अपनी विस्तृत अंतिम रिपोर्ट सौंपने की तैयारी कर रहा है।
सत्यापन के बिना नहीं चल सकेंगी ये गाड़ियां
एसडीएम सदर डॉ. राजदीप सिंह ने स्पष्ट किया है कि जिन 500 वाहनों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, उनके मालिक वर्तमान में सत्यापन के लिए कार्यालय आ रहे हैं। यदि वाहन मालिक सही दस्तावेज पेश करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस घोटाले में कुछ बड़े सफेदपोश लोग भी शामिल थे। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
