Himachal News: हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी ‘हिमकेयर’ योजना में एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को हैरान कर दिया है। सरकारी धन हड़पने के लिए कागजों पर पुरुषों की ओवरी (अंडाशय) के ऑपरेशन तक दिखा दिए गए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी किए हैं। विधानसभा के बजट सत्र में भी इस मुद्दे पर सरकार ने ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी।
हिमकेयर योजना में धांधली का सनसनीखेज खुलासा
मुख्यमंत्री सुक्खू ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए पिछली भाजपा सरकार के समय शुरू की गई इस योजना में बड़ी गड़बड़ियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आंतरिक ऑडिट में पुरुषों के अंडाशय की सर्जरी के बिल पास होने और मरीजों में एक्सपायर्ड लेंस प्रत्यारोपण जैसे बेहद गंभीर मामले मिले हैं। यह योजना उन गरीब परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मुहैया कराती है, जो केंद्र की आयुष्मान योजना के पात्र नहीं हैं।
सरकारी धन के दुरुपयोग पर मुख्यमंत्री का कड़ा प्रहार
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार को मौजूदा सरकार की तुलना में लगभग 60,000 करोड़ रुपये अधिक मिले थे। इसके बावजूद जनता के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं हुआ और उसे योजनाओं के नाम पर लुटाया गया। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग को अब पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
फतेहपुर को सौगातों की बौछार और औद्योगिक विकास
स्वास्थ्य घोटाले की जांच के आदेशों के बीच मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिले के फतेहपुर क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 10 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की। इसके अलावा, शाह नहर परियोजना के मुख्य अभियंता का कार्यालय अब वापस फतेहपुर में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री ने स्थानीय महिला मंडलों को 20,000 रुपये और वजीर राम सिंह स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए 50 लाख रुपये देने का वादा भी किया।
क्या है हिमकेयर योजना और विवाद की जड़?
हिमाचल सरकार द्वारा संचालित हिमकेयर योजना प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा रही है। लेकिन हालिया ऑडिट रिपोर्ट ने योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कागजों पर सर्जरी दिखाकर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निकाले जाने का अंदेशा है। मेडिकल बिलों की हेराफेरी में कई निजी अस्पतालों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है।
