Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में निगम, मंडल, बोर्ड और विभिन्न आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों की राह देख रहे भाजपा नेताओं को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार इन प्रतिष्ठित पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया फिलहाल कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दी गई है। इस फैसले के पीछे दो प्रमुख कारण सामने आए हैं जिनकी वजह से सत्ता पक्ष ने फिलहाल रुकने का निर्णय लिया है। नेताओं को अब मई माह तक प्रतीक्षा करनी होगी।
हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस समय पार्टी का संपूर्ण ध्यान और संगठनात्मक शक्ति पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर केंद्रित है। हालांकि उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि विभिन्न निगमों और मंडलों के लिए पदाधिकारियों की सूची लगभग अंतिम चरण में है। जिन प्रमुख नेताओं को समायोजित किया जाना है उनके नामों पर व्यापक विचार-विमर्श पूरा हो चुका है।
चार मई को चुनाव परिणाम के बाद शुरू होगी घोषणाएं
भाजपा नेता के अनुसार अभी कुछ शेष नामों पर आंतरिक स्तर पर मंथन किया जाना बाकी है। इन नामों पर अंतिम मुहर लगने में थोड़ा और समय लग सकता है। उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि आगामी चार मई को जैसे ही पांचों राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होंगे, उसके तुरंत बाद निगमों और मंडलों में नियुक्तियों की सूचियां जारी करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। इसलिए इच्छुक दावेदारों को थोड़ा और धैर्य रखने की सलाह दी गई है।
इस बीच भोपाल स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में इन्हीं नियुक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक से निकले संकेतों के अनुसार फिलहाल निगम, मंडल और प्राधिकरणों के अध्यक्ष पदों पर किसी के नाम की तत्काल घोषणा नहीं की जाएगी। नियुक्तियों को लेकर एक नई रणनीति पर काम हो रहा है।
अध्यक्ष के साथ ही जारी होंगे उपाध्यक्ष और सदस्यों के नाम
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि इस बार पूरी टीम की घोषणा एक साथ करके राजनीतिक समन्वय को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। पूर्व की परंपरा के विपरीत इस बार केवल अध्यक्ष पद का नाम जारी नहीं किया जाएगा। इसके बजाय पूरे आयोग या निगम की टीम जिसमें अध्यक्ष के साथ-साथ उपाध्यक्ष और सदस्यों के नाम शामिल होंगे, एकमुश्त जारी किए जाने की संभावना है। ऐसा करने से कार्य संचालन की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकेगी और प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से चल सकेंगे।
बैठक में उपस्थित सभी जिला प्रभारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से संभावित नामों का चयन शीघ्रता से पूरा कर लें। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि अध्यक्षों के नामों के साथ ही उपाध्यक्षों और सदस्यों की सूची भी एक साथ अंतिम रूप देकर जारी की जा सके। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो मई माह के अंत तक इन प्रतिष्ठित नियुक्तियों की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। फिलहाल सभी की निगाहें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं।
दिल्ली से मिल चुकी है नियुक्ति सूचियों को हरी झंडी
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभिन्न निगमों और मंडलों के नाम अब लगभग अंतिम रूप से तय माने जा रहे हैं। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व यानी दिल्ली हाईकमान से इन सभी प्रस्तावित सूचियों को आधिकारिक स्वीकृति मिल चुकी है। केवल औपचारिक घोषणा का समय निर्धारित किया जाना बाकी है। यह स्पष्ट है कि सभी नियुक्तियों की सूची लगभग एक साथ ही सार्वजनिक की जाएगी ताकि किसी प्रकार का असंतोष या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। संगठन पूरी पारदर्शिता के साथ यह प्रक्रिया पूरी करना चाहता है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का संगठन लगातार विभिन्न स्तरों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया को अंजाम दे रहा है। अभी हाल ही में पार्टी ने प्रदेश के नगरीय निकायों के लिए एल्डरमैन की नियुक्ति का कार्य किया था। जारी की गई पहली सूची में नगर परिषदों और नगर पालिकाओं को मिलाकर कुल एक सौ उनहत्तर निकायों में एल्डरमैन नियुक्त किए जा चुके हैं। यह प्रक्रिया अभी भी जारी है और आने वाले समय में राज्य के नगर निगमों सहित कुल दो सौ चौवालीस निकायों में और एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे।
विश्वविद्यालयों की कार्यपरिषद में भी जारी है नियुक्ति प्रक्रिया
राजनीतिक नियुक्तियों का यह सिलसिला केवल निगम और निकायों तक ही सीमित नहीं है। प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों की कार्यपरिषदों में भी सक्रिय रूप से नियुक्तियां की जा रही हैं। इन महत्वपूर्ण शैक्षणिक पदों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए वरिष्ठ एवं वफादार नेताओं को शामिल किया जा रहा है। संगठन का यह प्रयास है कि हर महत्वपूर्ण संस्थान में वैचारिक प्रतिबद्धता वाले व्यक्तियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए ताकि विकास कार्यों में गति आए और नीतियों का सुचारू क्रियान्वयन हो सके। यह पूरी कवायद आगामी स्थानीय और आम चुनावों की तैयारी का हिस्सा भी मानी जा रही है।
