India News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यूरोप के चार महत्वपूर्ण देशों की यात्रा पर जा सकते हैं। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यह हाई-प्रोफाइल दौरा 15 से 20 मई के बीच होने की प्रबल संभावना है। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी नार्वे, स्वीडन, नीदरलैंड्स और इटली का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री नार्वे में आयोजित होने वाले ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ में भी शिरकत करेंगे। वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच इस दौरे को भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
FTA समझौते के बाद पहली ऐतिहासिक यात्रा
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद यह पीएम मोदी की पहली यूरोप यात्रा होगी। इसी साल जनवरी में करीब 18 साल के लंबे इंतजार के बाद दोनों पक्षों के बीच इस व्यापारिक समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के लागू होने से भारत के 93 प्रतिशत उत्पाद यूरोपीय बाजारों में बिना किसी शुल्क के प्रवेश कर सकेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत-यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना है।
ऊर्जा संकट और वैश्विक युद्ध के साये में दौरा
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी है। इस युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल आपूर्ति बाधित हुई है। ज्ञात हो कि दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। सप्लाई चेन टूटने से कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। ऐसे में भारत यूरोप के साथ मिलकर वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों पर चर्चा कर सकता है।
मेक इन इंडिया को मिलेगा जबरदस्त बूस्ट
यूरोपीय संघ के साथ हुआ यह समझौता भारत के लिए आर्थिक रूप से गेम-चेंजर साबित होने वाला है। सरकार को उम्मीद है कि इस यात्रा से नॉर्डिक देशों से निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। इससे न केवल निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी। भारत-ईयू वार्ता पहली बार 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई मतभेदों के चलते यह 2013 में रुक गई थी। अब जनवरी 2026 में हुए समझौते के बाद पीएम मोदी इस अवसर को भुनाने के लिए तैयार हैं।
नार्वे में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन पर नजरें
पीएम मोदी की यात्रा का एक प्रमुख केंद्र नार्वे होगा, जहां वह नॉर्डिक देशों के शीर्ष नेतृत्व से मिलेंगे। भारत और नॉर्डिक देशों के बीच हरित विकास, जलवायु परिवर्तन और नई तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया है, लेकिन रणनीतिक हल्कों में इसकी चर्चा तेज है। यह दौरा न केवल व्यापार बल्कि वैश्विक शांति और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।
