Himachal News: देश की सर्वोच्च दवा नियामक संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मार्च महीने का ड्रग अलर्ट जारी कर हड़कंप मचा दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में निर्मित 141 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें कफ सिरप, जीवन रक्षक इंजेक्शन और दिल-मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में हिमाचल प्रदेश की सर्वाधिक 47 दवाएं फेल पाई गई हैं।
दिल, शुगर और बीपी की दवाओं पर उठे गंभीर सवाल
सीडीएससीओ की रिपोर्ट बताती है कि फेल हुए सैंपलों में केवल सामान्य दवाएं ही नहीं, बल्कि शुगर, ब्लड प्रेशर और मिर्गी जैसी बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण औषधियां भी शामिल हैं। कुछ आयरन और विटामिन की गोलियां भी परीक्षण में अमानक मिली हैं। उत्तराखंड की 20 और गुजरात की 23 दवाओं के सैंपल भी फेल हुए हैं। यह रिपोर्ट भारतीय फार्मा उद्योग की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
कफ सिरप के 17 सैंपल फेल होना बड़ी चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय 17 कफ सिरप के सैंपलों का फेल होना है। हाल के वर्षों में कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विवाद रहे हैं। इसके अलावा, रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले उत्पाद जैसे टूथपेस्ट, साबुन और मेहंदी कोन भी जांच में असुरक्षित पाए गए हैं। राजस्थान में बनी चार तरह की मेहंदी कोन और उत्तराखंड का टूथपेस्ट मानकों का उल्लंघन करते पाए गए हैं।
इन प्रमुख दवाओं के इस्तेमाल से बचें
जांच में सर्दी-जुकाम और बुखार के लिए उपयोग होने वाली ‘पैरासिटामोल व फिनाइलएफ्राइन सस्पेंशन’ (बैच 241175) गुणवत्ताहीन पाई गई है। वहीं, पेट दर्द और मासिक धर्म के दर्द में राहत देने वाली ‘डाइक्लोमीन टैबलेट्स’ (बैच THY25001AL) का सैंपल भी फेल रहा। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग इन विशिष्ट बैच नंबर वाली दवाओं का सेवन बिल्कुल न करें। राजस्थान की मेहंदी कोन में भी पैकेट पर दर्शाई गई सामग्री गायब मिली है।
हिमाचल के दवा उद्योग पर प्रशासन का कड़ा रुख
राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने स्पष्ट किया है कि हिमाचल में देश की एक तिहाई दवाएं बनती हैं, इसलिए यहां सैंपलिंग अधिक होती है। उन्होंने बताया कि जिन उद्योगों के सैंपल फेल हुए हैं, उनका उत्पादन तुरंत बंद करवा दिया गया है। संबंधित इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सख्त जवाब मांगा गया है। विभाग का कहना है कि दवाओं की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
