Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब बद्दी में वायु प्रदूषण ने डरावना रूप अख्तियार कर लिया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक बद्दी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 222 तक पहुंच गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस स्थिति को ‘खराब’ श्रेणी में रखा है। इसके विपरीत पर्यटन नगरी मनाली की हवा सबसे शुद्ध पाई गई है। वहां का सूचकांक महज 30 दर्ज किया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ता जहर अब स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
बद्दी में क्यों जहरीली हो रही है हवा?
औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में प्रदूषण बढ़ने के पीछे केवल फैक्ट्रियां ही एकमात्र कारण नहीं हैं। वर्तमान में क्षेत्र में गेहूं की कटाई और थ्रैशिंग का काम जोरों पर चल रहा है। इस प्रक्रिया से निकलने वाली धूल हवा में मिलकर उसे प्रदूषित कर रही है। इसके अलावा शहर की बदहाल सड़कें भी एक बड़ी मुसीबत बनी हुई हैं। जब भी कोई वाहन इन टूटी सड़कों से गुजरता है, तो धूल का गुबार आसमान छूने लगता है। इससे वायु गुणवत्ता लगातार गिर रही है।
खुले वाहनों और निर्माण सामग्री ने बढ़ाया संकट
शहर में चल रहे निर्माण कार्यों ने भी आबोहवा को खराब करने में बड़ी भूमिका निभाई है। खुले ट्रकों और ट्रैक्टरों में निर्माण सामग्री ढोने से रेत और मिट्टी के कण हवा में घुल रहे हैं। प्रशासन ने खुले में सामग्री ले जाने पर पाबंदी तो लगाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा। फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाला काला धुआं इस समस्या को और अधिक गंभीर बना रहा है। सांस के मरीजों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
पांवटा साहिब दूसरे और मनाली सबसे साफ स्थान पर
हिमाचल प्रदेश के अन्य शहरों की बात करें तो पांवटा साहिब प्रदूषण के मामले में दूसरे नंबर पर है। यहाँ का AQI 123 दर्ज किया गया है, जो मध्यम श्रेणी में आता है। दूसरी ओर मनाली ने पर्यावरण संरक्षण की बेहतरीन मिसाल पेश की है। वहां की हवा पहाड़ों जैसी ही ताजी और साफ बनी हुई है। प्रदूषण के इन आंकड़ों ने औद्योगिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की बड़ी जरूरत को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कड़ा रुख और निर्देश
बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग के अधिशासी अभियंता अभय परमार ने संबंधित विभागों को सड़कों की तत्काल मरम्मत करने के आदेश दिए हैं। धूल को दबाने के लिए सड़कों पर नियमित जल छिड़काव करने और धूल फैलाने वाले वाहनों के चालान काटने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन अब निर्माण स्थलों की भी कड़ी निगरानी करेगा। बोर्ड ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
