Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही फिर चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में उन्होंने तकनीकी इस्तीफा वापस ले लिया है। कुछ समय पहले उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब उन्होंने बेहद गोपनीय तरीके से इस्तीफा वापस लिया है। इस मामले पर अधिकारी अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। यह घटनाक्रम प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना है।
इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजह
आईएएस रिंकू सिंह राही ने मार्च के अंतिम सप्ताह में अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा था। उन्होंने अपने पत्र में सिस्टम पर कई सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि उन्हें काम करने का उचित अवसर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा था कि प्रशासनिक ढांचे के समानांतर एक अलग व्यवस्था चल रही है। उनका यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने आकर अपनी बात मजबूती से रखी थी।
उच्च स्तर पर हो रहा विचार
वर्तमान समय में रिंकू सिंह राजस्व परिषद से संबद्ध चल रहे हैं। वह संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी हैं। सूत्रों के अनुसार उनके इस्तीफे का मामला अब शासन के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस्तीफा वापस लेने की प्रक्रिया इतनी गोपनीय रही कि किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया। उन्होंने दबी जुबान में केवल इतना कहा कि मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है।
वकीलों के सामने हुआ था विवाद
यह पहली बार नहीं है जब रिंकू सिंह राही किसी बड़े विवाद में फंसे हों। कुछ समय पहले मथुरा से शाहजहांपुर तबादले के बाद उनका एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में वह वकीलों के सामने कान पकड़कर माफी मांगते नजर आए थे। यह घटना सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हुई थी। इसके तुरंत बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाया था। उन्हें उपजिलाधिकारी पद से हटाकर लखनऊ के राजस्व परिषद में भेज दिया गया था। वह वहीं कार्यरत हैं।
पीसीएस से आईएएस तक का सफर
हाथरस जिले में जन्मे रिंकू सिंह का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा एक साधारण सरकारी स्कूल में हुई थी। साल दो हजार चार में उन्होंने प्रांतीय सिविल सेवा की परीक्षा सफलतापूर्वक पास की थी। इसके बाद दो हजार आठ में उन्हें जिला समाज कल्याण अधिकारी बनाया गया था। नौकरी के दौरान ही उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी जारी रखी। अपनी कड़ी मेहनत से वह उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी चुन लिए गए थे।
