New Delhi News: पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण संघर्ष को अब लगभग दो महीने बीत चुके हैं। अट्ठाइस फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया था। इसके बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। भारत अपनी जरूरत का आधा कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से मंगाता है। कच्चे तेल की भारी कमी से बचने के लिए भारत सरकार ने अब तेजी से अन्य देशों की ओर अपना रुख कर लिया है।
रूस बना भारत के लिए तेल का सबसे बड़ा सहारा
संकट की इस घड़ी में रूस भारत के लिए सबसे बड़ा मददगार बनकर सामने आया है। भारत ने मार्च महीने में रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदा है। आंकड़ों के अनुसार भारत ने औसतन उन्नीस लाख अस्सी हजार बैरल तेल प्रतिदिन आयात किया है। यह आंकड़ा पिछले महीनों की तुलना में लगभग दोगुना हो गया है। अमेरिका ने समुद्र में मौजूद रूसी तेल पर सोलह मई तक खास छूट दी है। इस छूट का भारत को सीधा फायदा मिला है।
अफ्रीका और वेनेजुएला से भी कच्चे तेल की सप्लाई शुरू
भारत सरकार अब केवल रूस पर निर्भर नहीं रहना चाहती है। सरकार ने तेल आपूर्ति के लिए अन्य वैश्विक बाजारों का भी रुख किया है। भारत ने मार्च में अंगोला से तेल का आयात तीन गुना बढ़ा दिया है। यह आंकड़ा तीन लाख सत्ताईस हजार बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। अप्रैल के मध्य तक ईरान और वेनेजुएला से भी भारत में कच्चा तेल पहुंचा है। इसके अलावा भारत ने नाइजीरिया से भी अपनी तेल खरीद काफी तेज कर दी है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई सरकार की चिंता
भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को सुरक्षित कर लिया है। इसके बावजूद आने वाले समय में कई चुनौतियां मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार भारी तेजी आ रही है। अफ्रीकी तेल पूरी तरह से मध्य पूर्व के तेल का विकल्प नहीं बन सकता है। भारतीय रिफाइनरियां खास ग्रेड के तेल के लिए ही डिजाइन की गई हैं। इन वैकल्पिक खरीद के बाद भी भारत के कुल तेल आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
क्या चुनाव के बाद आम जनता को लगेगा महंगाई का झटका?
सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने माना है कि तेल कंपनियां फिलहाल भारी घाटे में चल रही हैं। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर जनता को बड़ी राहत दी है। कंपनियों ने तुरंत कीमतें बढ़ाने से साफ इनकार किया है। हालांकि कई बाजार विश्लेषकों ने एक बड़ी चेतावनी दी है। उनका अनुमान है कि चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल अट्ठाइस रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है।
