Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर को बेनामी निवेश और भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार पंजाब मॉडल की तर्ज पर ‘अपार्टमेंट एक्ट’ को नए सिरे से लागू करने की तैयारी में है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य निवेशकों और आम खरीदारों के हितों की रक्षा करना है। नई व्यवस्था के तहत रियल एस्टेट में होने वाले हर वित्तीय लेनदेन को पारदर्शी बनाया जाएगा। इससे राज्य में बेनामी संपत्ति के निवेश पर पूरी तरह लगाम लगने की उम्मीद है।
चेस्टर हिल विवाद के बाद जागी सरकार, रेरा के साथ अब अपार्टमेंट एक्ट
हिमाचल प्रदेश में साल 2017 में रेरा (RERA) लागू होने के बाद तत्कालीन सरकार ने अपार्टमेंट एक्ट को समाप्त कर दिया था। हालांकि, हाल ही में सामने आए चेस्टर हिल परियोजना जैसे मामलों ने मौजूदा नियमों की कमियों को उजागर कर दिया है। सरकार ने महसूस किया है कि केवल रेरा के भरोसे रियल एस्टेट सेक्टर को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। अब निवेशकों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाकर जवाबदेही तय करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
आखिर क्या है अपार्टमेंट एक्ट और क्यों पड़ी इसकी दोबारा जरूरत?
अपार्टमेंट एक्ट एक कानूनी ढांचा है जो बहुमंजिला इमारतों और फ्लैटों की खरीद-बिक्री को विनियमित करता है। इसमें साझा सुविधाओं, प्रबंधन नियमों और मालिकाना हक का स्पष्ट निर्धारण होता है। हिमाचल में हाल के वर्षों में कई बाहरी लोगों ने स्थानीय निवासियों के नाम पर जमीन लेकर बड़े निवेश किए हैं। पारदर्शिता की इसी कमी को दूर करने के लिए एक्ट की वापसी जरूरी हो गई थी। अब बाहरी निवेशक तभी धन लगा सकेंगे जब वे इस एक्ट के तहत पंजीकृत होंगे।
पंजाब मॉडल से ली सीख, टीसीपी विभाग को मिलेंगे असीमित अधिकार
हिमाचल सरकार पंजाब के सफल रियल एस्टेट मॉडल का बारीकी से अध्ययन कर रही है। नई योजना के तहत हिमाचल में रेरा और अपार्टमेंट एक्ट दोनों समानांतर रूप से कार्य करेंगे। इस व्यवस्था में नगर एवं ग्राम नियोजन (TCP) विभाग को अधिक शक्तियां सौंपी जाएंगी। विभाग के निदेशक अब प्रोजेक्ट्स की सख्त निगरानी कर सकेंगे। इससे डेवलपर्स की मनमानी पर रोक लगेगी और समय पर प्रोजेक्ट पूरा न करने वाले प्रमोटरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
मंत्री राजेश धर्माणी का बयान: पारदर्शिता की ओर बढ़ता हिमाचल
नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी के अनुसार, सरकार रेरा के साथ अपार्टमेंट एक्ट लागू करने की संभावनाओं को गंभीरता से तलाश रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि 2017 में एक्ट खत्म होने के बाद नियमन में कुछ अंतराल आए थे। अब अन्य राज्यों के निवेशकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने और प्रमोटरों की जवाबदेही तय करने पर विचार हो रहा है। इस कदम से हिमाचल प्रदेश में रियल एस्टेट कारोबार अधिक संगठित होगा और धोखाधड़ी के मामलों में भारी कमी आएगी।
