Himachal News: हिमाचल प्रदेश के रामपुर स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर ने रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले दोषी ललित कुमार को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने पोक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह मामला न केवल एक मासूम की गरिमा से जुड़ा है, बल्कि समाज में भरोसे के कत्ल की एक दर्दनाक दास्तां भी बयां करता है।
भरोसे की आड़ में दरिंदगी: जब रक्षक ही बन गया भक्षक
घटना साल 2023 के फरवरी महीने की है, जब समाज और रिश्तों की सारी मर्यादाएं तार-तार हो गईं। दोषी ललित कुमार पीड़िता की माता का सगा भतीजा था और पड़ोस में ही रहता था। रात के सन्नाटे का फायदा उठाते हुए वह बच्ची के कमरे में घुसा और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। महज 15 साल की मासूम इस खौफनाक वारदात के बाद इतनी सहम गई कि उसने डर के मारे महीनों तक यह खौफनाक राज अपने सीने में ही दबाए रखा।
छह महीने बाद अस्पताल में हुआ खौफनाक सच्चाई का खुलासा
जुल्म की यह कहानी तब सामने आई जब वारदात के छह महीने बाद पीड़िता के पेट में अचानक तेज दर्द हुआ। घबराए परिजन उसे इलाज के लिए केएनएच अस्पताल शिमला ले गए। वहां डॉक्टरों ने जब अल्ट्रासाउंड किया, तो जो सच्चाई सामने आई उसने सबके पैरों तले जमीन खिसका दी। डॉक्टर ने बताया कि नाबालिग छह महीने की गर्भवती है। अस्पताल प्रबंधन ने बिना देरी किए तुरंत पुलिस को इस मामले की सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
19 गवाहों की गवाही और उप जिला न्यायवादी की प्रभावी पैरवी
न्याय की इस लड़ाई में कानून ने अपनी पूरी ताकत लगा दी ताकि पीड़िता को इंसाफ मिल सके। उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अदालत के सामने ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। मुकदमे के दौरान कुल 19 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक सबूतों और गवाहों के जरिए दोषी के जुर्म को पूरी तरह साबित कर दिया। दोनों पक्षों की लंबी दलीलों के बाद अदालत ने माना कि यह मामला समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
आर्थिक दंड और पीड़िता के लिए मुआवजे का बड़ा आदेश
अदालत ने ललित कुमार को 20 वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाने के साथ ही पीड़िता के भविष्य को लेकर भी संवेदनशीलता दिखाई। न्यायालय ने पीड़िता को 2,00,000 रुपये का मुआवजा (कंपनसेशन) देने के आदेश भी पारित किए हैं। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून की नजरों में गुनहगार चाहे कितना भी करीबी क्यों न हो, वह बच नहीं सकता।
