Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी में पूर्व सैनिक लीग की एक अहम बैठक में वीरता पुरस्कार विजेताओं और परिवहन विभाग के बीच उपजे विवाद पर कड़ा रुख अपनाया गया है। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर की अध्यक्षता में हुई इस ऑनलाइन बैठक में 25 अप्रैल की उस घटना पर गहन मंथन हुआ, जिसमें एक गैलंट्री अवॉर्ड विजेता और महिला कंडक्टर के बीच तीखी बहस हुई थी। लीग ने इसे प्रशासनिक ढिलाई और सरकारी विभागों के बीच तालमेल की भारी कमी का नतीजा बताया है।
डिजिटल बस कार्ड के फेर में फंसा सैनिकों का मान-सम्मान
ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर ने बताया कि सरकार ने 1 अप्रैल से डिजिटल बस कार्ड अनिवार्य कर दिए थे। हैरानी की बात यह है कि इस बड़े निर्णय की जानकारी राज्य या जिला स्तर के सैनिक कल्याण विभाग को नहीं दी गई। इसी संवादहीनता के कारण हवलदार कामेश्वर सिंह और शौर्य चक्र विजेता कैप्टन खेम सिंह जैसे जांबाजों को बस में असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। सरकार की इस कार्यप्रणाली ने वीर भूमि के योद्धाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई है, जिससे पूर्व सैनिकों में भारी आक्रोश है।
सैनिक लीग ने परिवहन यूनियन के रवैये पर जताई कड़ी नाराजगी
बैठक में लीग ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार समय रहते सैनिक कल्याण विभाग को विश्वास में लेती, तो इस अप्रिय विवाद को आसानी से टाला जा सकता था। हालांकि, कार्यकारिणी ने पूर्व सैनिक द्वारा ऊंची आवाज में बात करने की निंदा की, लेकिन एचआरटीसी यूनियन के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। लीग के अनुसार, एक छोटे से विवाद को एफआईआर तक ले जाना और इसे अनावश्यक तूल देना निराशाजनक है। यूनियन को वीरता पुरस्कार विजेताओं की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए था।
गैलंट्री अवॉर्ड विजेताओं के लिए अलग नोटिफिकेशन की उठी मांग
पूर्व सैनिक लीग ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार से डिजिटल कार्ड के लिए अलग नोटिफिकेशन जारी करने की मांग की है। कार्यकारिणी का कहना है कि कार्ड बनाने और इसके वार्षिक रिन्यूअल का पूरा आर्थिक बोझ सरकार खुद उठाए। जब तक सभी के नए डिजिटल कार्ड नहीं बन जाते, तब तक पुराने पासों को ही वैध माना जाए। परिवहन विभाग को इस संबंध में तत्काल स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी वीरता पुरस्कार विजेता का अपमान न हो।
भविष्य के लिए सरकार को अल्टीमेटम और संयम की अपील
लीग ने सभी पूर्व सैनिकों और वीर नारियों से अपील की है कि वे वर्तमान स्थिति में संयम बनाए रखें। साथ ही, सरकार को चेतावनी दी गई है कि सैनिकों से जुड़ी किसी भी योजना को लागू करने से पहले सैनिक कल्याण विभाग को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। बैठक में ऑनरेरी कैप्टन हेतराम शर्मा, कर्नल तारा प्रताप सिंह राणा और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि सैनिकों के मान-सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा।
