Gujarat News: आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए गुजरात से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और दिग्गज किसान नेता सागर रबारी ने अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा सांसदों के दलबदल के झटके के बाद यह ‘आप’ के लिए दूसरा बड़ा राजनीतिक आघात माना जा रहा है। 2026 के स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले रबारी का जाना राज्य में पार्टी के ग्रामीण संगठन को पूरी तरह हिला सकता है।
किसान मुद्दों पर मतभेद और पार्टी से मोहभंग
सागर रबारी के अचानक इस्तीफे के पीछे पार्टी की अंदरूनी कार्यप्रणाली और वैचारिक मतभेदों को मुख्य कारण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, रबारी पिछले कुछ समय से किसानों के ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी के ढुलमुल रवैये से खासे नाराज चल रहे थे। उन्होंने अपना आधिकारिक इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष को भेज दिया है। उनके जाने से पार्टी के उन कार्यकर्ताओं में हताशा है, जो उन्हें गुजरात में ‘आप’ का जमीनी और जुझारू चेहरा मानते थे।
जमीन अधिग्रहण और किसान हक की लड़ाई का बड़ा चेहरा
सागर रबारी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि गुजरात के ‘खेडुत अधिकार मंच’ के पूर्व प्रमुख और एक सक्रिय आंदोलनकारी रहे हैं। उन्होंने राज्य में जमीन अधिग्रहण और किसानों के हक के लिए कई सफल आंदोलनों का नेतृत्व किया है। 2021 में जब वह आम आदमी पार्टी में शामिल हुए, तब उन्हें एक बड़े ‘किसान चेहरे’ के रूप में पेश किया गया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की उपस्थिति दर्ज कराने में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही थी।
ग्रामीण क्षेत्रों में ‘आप’ के वोट बैंक पर पड़ेगा असर
रबारी का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब आम आदमी पार्टी गुजरात में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रही है। किसान समुदाय में उनके गहरे प्रभाव के कारण उत्तरी गुजरात और सौराष्ट्र जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में पार्टी को भारी नुकसान होने की आशंका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रबारी के बिना ‘आप’ के लिए ग्रामीण वोटरों को साधना अब आसान नहीं होगा। फिलहाल रबारी ने अपने भविष्य की रणनीतियों का खुलासा नहीं किया है।
स्थानीय निकाय चुनावों से पहले बदली राजनीतिक समीकरण
गुजरात में 2026 के म्युनिसिपल चुनावों से पहले सागर रबारी का इस्तीफा विपक्षी खेमे में हलचल पैदा कर चुका है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं या किसी अन्य शक्तिशाली दल का दामन थाम सकते हैं। ‘आप’ के ग्रामीण नेटवर्क का मुख्य आधार रबारी ही थे, इसलिए उनके हटने से संगठन की धार कुंद हो सकती है। पार्टी नेतृत्व अब डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन रबारी का कद भरना एक बड़ी चुनौती होगी।
