Uttarakhand News: उत्तराखंड के ऋषिकेश में पुलिस ने ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत एक ऐसी गिरफ्तारी की है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। खुद को कट्टर सनातनी और ‘सत्यनिष्ठ आर्य’ बताने वाला शख्स असल में बांग्लादेशी घुसपैठिया निकला। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी सनीउर रहमान पिछले कई सालों से फर्जी पहचान के आधार पर भारत में रह रहा था। वह न केवल धार्मिक उन्माद फैला रहा था, बल्कि सिस्टम को चकमा देकर अवैध रूप से चंदा भी जुटा रहा था।
नेपाल के रास्ते भारत में घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों का जाल
पूछताछ के दौरान सनीउर रहमान ने कबूल किया कि वह साल 2016 में नेपाल सीमा के जरिए अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुआ था। वह पश्चिम बंगाल, दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों में अपनी पहचान बदलकर छिपा रहा। आरोपी ने गाजियाबाद के पते का इस्तेमाल कर फर्जी सरकारी पहचान पत्र भी हासिल कर लिए थे। उसके पास से एक पुराना बांग्लादेशी पासपोर्ट बरामद हुआ है, जिसकी वैधता साल 2018 में ही खत्म हो चुकी थी। पुलिस अब उसके मददगारों की तलाश कर रही है।
सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो और पादरी से बदसलूकी का मामला
पकड़ा गया आरोपी ‘सत्यनिष्ठ आर्य’ के नाम से सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय था। वह अक्सर अलग-अलग धर्मों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करता और भड़काऊ वीडियो साझा करता था। पिछले साल क्रिसमस के मौके पर उसने गाजियाबाद के एक चर्च में घुसकर पादरी के साथ अभद्रता की थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। पहचान बदलने के बाद उसने कई हिंदू संगठनों के कार्यक्रमों में अपनी पैठ बना ली थी और ऑनलाइन चंदा इकट्ठा कर रहा था।
ऋषिकेश पुलिस की पैनी नजर और ‘ऑपरेशन प्रहार’ की बड़ी कामयाबी
लक्ष्मण झूला पुलिस ने चेकिंग अभियान के दौरान संदिग्ध लगने पर सनीउर रहमान को हिरासत में लिया था। शुरुआती पूछताछ में वह पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन सख्ती बरतने पर उसने अपना असली नाम और पता उगल दिया। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और विदेशी अधिनियम-2025 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या उसका संबंध किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क या देश विरोधी गतिविधियों से तो नहीं है।
सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर आरोपी के वित्तीय स्रोत और संपर्क
सनीउर रहमान यूपीआई (UPI) के जरिए लोगों से वित्तीय सहायता मांगता था, जिसका इस्तेमाल वह अपनी गतिविधियों को बढ़ाने में करता था। वह गिरफ्तारी से महज एक दिन पहले ही ऋषिकेश पहुंचा था और किसी बड़ी साजिश की फिराक में था। पुलिस अब उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स और बैंक खातों की जांच कर रही है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा को और पुख्ता किया जा सके।
