Sonipat News: पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी के कारण इसका पता अंतिम चरणों में चलता है। समय पर पहचान न होने से इलाज काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, अगर शुरुआती दौर में इसकी पहचान हो जाए, तो ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है। सोनीपत स्थित एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल की एक्सपर्ट डॉ. पर्ल आनंद ने इस गंभीर बीमारी के लक्षणों और बचाव पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान क्यों है चुनौतीपूर्ण?
प्रोस्टेट कैंसर की पहचान शुरुआती स्टेज में काफी मुश्किल होती है। इसका मुख्य कारण कैंसर कोशिकाओं का बहुत धीमी गति से विकसित होना है। शुरुआती ट्यूमर प्रोस्टेट ग्लैंड के भीतर ही सिमटे रहते हैं। वे शरीर के अन्य अंगों पर कोई दबाव नहीं डालते। प्रोस्टेट शरीर के पेल्विस हिस्से में गहराई में स्थित होता है। इस वजह से छोटे ट्यूमर के कारण न तो दर्द होता है और न ही इन्हें बाहर से महसूस किया जा सकता है।
उम्र का असर या कैंसर का संकेत? पुरुष अक्सर करते हैं ये गलती
अक्सर पुरुष पेशाब से जुड़ी समस्याओं को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मान लेते हैं। प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे ‘बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया’ से मिलते-जुलते होते हैं। उम्र के साथ प्रोस्टेट ग्लैंड का बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसी भ्रम में लोग डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देते हैं। स्क्रीनिंग की सीमाएं भी एक बड़ी बाधा हैं। पीएसए (PSA) टेस्ट हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होते, जिससे कभी-कभी गलत रिपोर्ट भी आ सकती है।
सावधान! शरीर में दिखने वाले इन 8 लक्षणों को कभी न भूलें
जैसे-जैसे कैंसर शरीर में पैर पसारता है, शरीर कुछ विशेष संकेत देने लगता है। अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें:
- पेशाब शुरू करने में कठिनाई होना या अधिक जोर लगाना।
- पेशाब की धार का कमजोर होना या बीच में रुक जाना।
- रात के समय बार-बार पेशाब आने की समस्या।
- पेशाब करने के बाद भी ब्लैडर खाली न होने का अहसास।
- पेशाब या वीर्य (Semen) में खून के लक्षण दिखना।
- अचानक इरेक्टाइल डिसफंक्शन या कमजोरी महसूस करना।
- पेशाब के दौरान तेज जलन या दर्द होना।
- कूल्हों, पीठ या छाती में लगातार बना रहने वाला दर्द।
हड्डियों तक कैंसर फैलने के खतरनाक संकेत और बचाव के तरीके
जब कैंसर प्रोस्टेट से बाहर निकलकर हड्डियों तक पहुंचता है, तो स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे में पैरों में कमजोरी, सुन्नपन और बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षण दिखते हैं। लगातार थकान रहना भी खतरे की घंटी हो सकती है। बचाव के लिए 50 वर्ष की आयु के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच अनिवार्य है। यदि परिवार में कैंसर का इतिहास रहा हो, तो 45 वर्ष की उम्र से ही नियमित पीएसए टेस्ट करवाना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
