Delhi News: राजधानी के प्रतिष्ठित सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चारा काटने वाली मशीन की चपेट में आकर अपने दोनों हाथ गंवा चुकी एक युवा महिला को सफल हैंड ट्रांसप्लांट के जरिए नई जिंदगी मिली है। ब्रेन-डेड डोनर के अंगों की मदद से डॉक्टरों ने करीब 12 घंटे तक चले अत्यंत जटिल ऑपरेशन के बाद महिला के दोनों हाथ सफलतापूर्वक जोड़ दिए हैं। अब वह अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहेगी।
12 घंटे चली मैराथन सर्जरी और सूक्ष्म तकनीक का कमाल
इस बेहद चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अंजाम देने के लिए डॉक्टरों की एक बड़ी टीम ने दिन-रात एक कर दिया। ऑपरेशन के दौरान नसों, मांसपेशियों, हड्डियों और रक्त वाहिकाओं को अत्यंत सूक्ष्म तकनीक यानी माइक्रोसर्जरी के जरिए जोड़ा गया। दाहिना हाथ कोहनी के ऊपरी हिस्से (सुप्राकान्डिलर) और बायां हाथ कलाई के पास (डिस्टल फोरआर्म) से जोड़ा गया है। इस पूरी प्रक्रिया में हड्डियों को स्थिर करना और रक्त प्रवाह को दोबारा बहाल करना सबसे कठिन काम था, जिसे डॉक्टरों ने बखूबी अंजाम दिया।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दिखाया हुनर
इस ऐतिहासिक सर्जरी में डॉ. महेश मंगल, डॉ. अनुभव गुप्ता, डॉ. भीम नंदा और डॉ. निखिल झुनझुनवाला जैसे दिग्गज विशेषज्ञ शामिल रहे। डॉ. महेश मंगल ने बताया कि द्विपक्षीय हाथ प्रत्यारोपण दुनिया की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक है। डॉ. अनुभव गुप्ता के अनुसार, इस सर्जरी का मुख्य उद्देश्य मरीज को समाज में गरिमा के साथ आत्मनिर्भर बनाना है। डॉ. भीम नंदा ने जानकारी दी कि लंबे समय तक शरीर से अलग रहे ऊतकों को जीवित रखना इस ऑपरेशन का सबसे बड़ा रिस्क था।
कई विभागों के तालमेल और अंगदान से मिली सफलता
यह कामयाबी केवल एक विभाग की नहीं, बल्कि प्लास्टिक सर्जरी, आर्थोपेडिक्स, एनेस्थीसिया और नेफ्रोलाजी सहित कई विभागों के आपसी समन्वय का परिणाम है। अस्पताल प्रशासन ने अंगदाता (डोनर) के परिवार का आभार व्यक्त किया है, जिनके निस्वार्थ फैसले ने एक बेबस महिला को दोबारा आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया। डॉक्टरों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद अब फिजियोथेरेपी और दवाइयों के जरिए मरीज की रिकवरी पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि हाथों की कार्यक्षमता पूरी तरह वापस आ सके।
