Ayodhya News: “मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।” अयोध्या की शिवानी ने इन पंक्तियों को हकीकत में बदल कर दिखाया है। दोनों हाथ न होने के बावजूद शिवानी ने इंटरमीडिएट की परीक्षा न केवल दी, बल्कि 60 प्रतिशत अंकों के साथ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होकर सबको चौंका दिया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षा में उसने अपने पैरों की अंगुलियों से कॉपी लिखकर यह मुकाम हासिल किया है।
हादसे ने छीने हाथ, पर नहीं डिगा हौसला
अयोध्या के नयागंज इलाके की रहने वाली शिवानी के साथ बचपन में एक दर्दनाक हादसा हुआ था। ट्यूबवेल की चपेट में आने से उसने अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे। शिवानी के पिता धर्मराज एक साधारण ट्रैक्टर चालक हैं और मजदूरी कर परिवार पालते हैं। बेटी के हाथ कटने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया था, लेकिन नन्हीं शिवानी ने हार नहीं मानी। उसने धीरे-धीरे अपने पैरों से लिखने का अभ्यास शुरू किया और आज वह सामान्य बच्चों की तरह ही तेजी से लिख लेती है।
हाईस्कूल के बाद इंटर में भी गाड़े सफलता के झंडे
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज रुदौली की छात्रा शिवानी की यह कोई पहली सफलता नहीं है। इससे पहले 2024 में उसने इसी जज्बे के साथ हाईस्कूल की परीक्षा भी पास की थी। शिवानी ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी प्रधानाचार्य आफरीन फातिमा, स्कूल की शिक्षिकाओं और अपने माता-पिता को दिया है। वह बताती हैं कि शुरुआत में पैरों से लिखना बहुत चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उनके जुनून ने हर बाधा को पार कर लिया। अब वह आगे बीए (BA) की पढ़ाई करना चाहती हैं।
समाजसेवी ने लिया पढ़ाई का पूरा जिम्मा
शिवानी के इस असाधारण जज्बे को देखते हुए समाजसेवी डॉ. नेहाल रजा ने उसे गोद लेने का फैसला किया है। उन्होंने संकल्प लिया है कि शिवानी आगे जितनी भी पढ़ाई करना चाहेगी, उसका पूरा खर्च वह स्वयं वहन करेंगे। डॉ. रजा ने शिवानी को मिठाई खिलाकर सम्मानित किया और कहा कि ऐसी प्रतिभाओं का हौसला कभी टूटना नहीं चाहिए। शिवानी ने पिछले चुनावों के दौरान मतदाता जागरूकता (SVEEP) कार्यक्रम में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिसकी हर तरफ सराहना हुई थी।
