UP बनेगा देश का ‘वेटलैंड कैपिटल’: तमिलनाडु को पछाड़ने की तैयारी, 12 रामसर साइट्स के साथ नंबर 2 पर पहुंचा राज्य

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की झीलों और तालाबों को अब वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान मिल रही है। आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण में बड़ी छलांग लगाते हुए यूपी ने 12 रामसर साइट्स के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त कर लिया है। हाल ही में अलीगढ़ की शेखा झील को इस सूची में शामिल किए जाने के बाद राज्य सरकार ने अब तमिलनाडु को पीछे छोड़कर देश में नंबर वन बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को नई आर्द्रभूमियों की पहचान और उनके वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।

तमिलनाडु को पीछे छोड़ने की मास्टर प्लानिंग

वर्तमान में भारत में कुल 99 रामसर साइट्स हैं, जिनमें 20 साइट्स के साथ तमिलनाडु शीर्ष पर काबिज है। उत्तर प्रदेश सरकार अब एक विशेष रणनीति के तहत राज्य के बड़े जलाशयों का कायाकल्प कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, बलिया स्थित सुरहाताल पक्षी विहार का प्रस्ताव अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल सकती है। इसके अलावा कई अन्य जिलों के वेटलैंड्स का डेटा तैयार किया जा रहा है, ताकि यूपी जल्द ही 20 से अधिक साइट्स के साथ देश का नेतृत्व कर सके।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बूढ़ा

किसी भी वेटलैंड को रामसर साइट का दर्जा मिलने से उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग होती है। इससे न केवल जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के आवास सुरक्षित होते हैं, बल्कि विदेशी पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों की आवाजाही भी बढ़ती है। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा-यमुना के दोआब क्षेत्र में फैली उत्तर प्रदेश की आर्द्रभूमियां पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

क्या है रामसर कन्वेंशन और इसका महत्व?

रामसर कन्वेंशन एक वैश्विक संधि है, जिस पर 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर किए गए थे। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के महत्वपूर्ण वेटलैंड्स का संरक्षण करना है। इस संधि के नियमों के अनुसार, केवल उन्हीं जलाशयों को चुना जाता है जो पशु-पक्षियों का प्राकृतिक आवास हों और जहां जैव विविधता की प्रचुर संभावनाएं हों। स्विटजरलैंड स्थित मुख्यालय से इन साइट्स की निगरानी की जाती है, जबकि इनके रख-रखाव की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र सरकार की होती है।

विभिन्न राज्यों में रामसर साइट्स की स्थिति

आर्द्रभूमि संरक्षण के मामले में उत्तर प्रदेश ने पंजाब, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पंजाब, ओडिशा और बिहार में 6-6 रामसर साइट्स हैं, जबकि गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 5-5 साइट्स मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और सरकार की सक्रियता इसे इस दौड़ में सबसे आगे रख रही है। जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में उठाए गए ये कदम भविष्य में राज्य के लिए ‘सुरक्षा कवच’ का काम करेंगे।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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