ब्रिक्स बैठक में मिडिल-ईस्ट पर नहीं बन पाई आम सहमति, भारत ने जारी किया ‘चेयर स्टेटमेंट’

India News: भारत की अध्यक्षता में पिछले हफ्ते नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों की बैठक में मिडिल-ईस्ट संघर्ष को लेकर कोई साझा घोषणापत्र जारी नहीं हो सका। सदस्य देशों के बीच गहराते मतभेदों के कारण आम सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद भारत को ‘अध्यक्ष का बयान’ (Chair’s Statement) जारी कर बैठक समाप्त करनी पड़ी। सूत्रों के अनुसार, संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल सदस्य देशों के अलग-अलग रुख ने एक संयुक्त बयान की संभावनाओं को खत्म कर दिया। भारत अगले महीने विदेश मंत्रियों की मेजबानी करेगा, जहां इन कूटनीतिक चुनौतियों से निपटने की कोशिश होगी।

क्यों टला संयुक्त बयान और क्या थे विवाद के बिंदु?

बैठक में ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब जैसे देशों की मौजूदगी ने चर्चा को जटिल बना दिया। ईरान चाहता था कि ब्रिक्स देश अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाएं। हालांकि, यूएई और सऊदी अरब के अपने कूटनीतिक समीकरणों के चलते इस पर सहमति नहीं बन सकी। भारत ने गतिरोध दूर करने के काफी प्रयास किए, लेकिन अंततः केवल ‘चेयर स्टेटमेंट’ ही जारी किया गया। इसमें सदस्य देशों ने मिडिल-ईस्ट की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात दोहराई।

फलस्तीन मुद्दे पर भारत का रुख अडिग

विवादों के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि फलस्तीन के प्रति भारत की दशकों पुरानी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। सरकारी सूत्रों ने उन अटकलों को खारिज कर दिया जिनमें भारत के रुख में नरमी की बात कही गई थी। भारत आज भी ‘दो-राष्ट्र समाधान’ (Two-State Solution) के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत एक ऐसे संप्रभु और स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र का समर्थन करता है जो सुरक्षित सीमाओं के भीतर इजरायल के साथ शांतिपूर्वक रह सके। भारत संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन की पूर्ण सदस्यता का भी पुरजोर समर्थक है।

मानवीय सहायता और शांति प्रयासों में भारत की भूमिका

गाजा में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत ने अब तक 70 मीट्रिक टन मानवीय सहायता भेजी है। इसमें दवाएं और चिकित्सा सामग्री शामिल हैं, जो सीधे फलस्तीनी लोगों तक पहुंचाई गई हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA) को इस साल भी 5 मिलियन डॉलर की वित्तीय मदद दी है। इसके अलावा, भारत ने ‘शर्म अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन’ और यूएनएससी प्रस्ताव 2803 का समर्थन किया है, जिसमें गाजा में युद्ध खत्म करने के लिए 20-सूत्रीय शांति योजना का प्रस्ताव दिया गया है।

ब्रिक्स सम्मेलन और आगामी चुनौतियां

भारत इस साल ब्रिक्स का अध्यक्ष है और साल के अंत में शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। मौजूदा गतिरोध यह संकेत देता है कि विस्तारित ब्रिक्स समूह में राजनीतिक एकमत बनाना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा होगी। अगले महीने होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें शिखर सम्मेलन का एजेंडा तय किया जाएगा। भारत की कोशिश होगी कि मतभेदों के बावजूद समूह को आर्थिक और मानवीय सहयोग के मुद्दों पर एकजुट रखा जा सके ताकि वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की प्रासंगिकता बनी रहे।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

ट्रंप पर हमले को लेकर विजय वडेट्टीवार का विवादित बयान, भारत की स्थिति से की तुलना

Maharashtra News: महाराष्ट्र कांग्रेस के दिग्गज नेता विजय वडेट्टीवार...

Related Articles

Popular Categories