Himachal Pradesh News: रोहड़ू क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी के बीच आयोजित हो रहे सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में हथियारों का सरेआम प्रदर्शन गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। परंपरा की आड़ में भीड़भाड़ वाले इलाकों में बंदूकों के साथ पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार की शिकायतों के बावजूद प्रशासन इस खतरनाक चलन को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है। प्रशासनिक सुस्ती अब सीधे तौर पर आम नागरिकों की जान को जोखिम में डाल रही है।
रोहड़ू में कानून की धज्जियां और प्रशासनिक विफलता
रोहड़ू के विभिन्न मेलों और देव आयोजनों में हवाई फायरिंग की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि पूर्व में हुई ऐसी कई घटनाओं की जानकारी पुलिस और एसडीएम कार्यालय को दी गई थी। इसके बावजूद किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। प्रशासन का लचीला रुख आयोजकों और हथियार प्रदर्शन करने वालों के हौसले बुलंद कर रहा है। कानून की मौजूदगी के बाद भी उसका पालन न होना एक गंभीर विफलता है।
सख्त पाबंदी के बजाय केवल कागजी औपचारिकताओं का सहारा
सार्वजनिक स्थलों और जुलूसों में हथियार ले जाने पर पहले से ही सख्त कानूनी प्रतिबंध लागू हैं। हालांकि, रोहड़ू में इन नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन देखा जा रहा है। अधिकारियों द्वारा भविष्य में प्रतिबंध लगाने की बात करना जनता को केवल गुमराह करने जैसा प्रतीत होता है। लोगों का मानना है कि जब तक मौके पर तैनात सुरक्षा अधिकारी और अनुमति देने वाले एसडीएम जवाबदेह नहीं होंगे, तब तक स्थिति में सुधार संभव नहीं है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण लोग अब अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं।
जवाबदेही तय करने और कड़े सुरक्षा इंतजामों की मांग
क्षेत्र की जनता अब इस मामले में आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि पिछले आयोजनों की उच्च स्तरीय जांच की जाए और दोषियों को सजा दी जाए। सुरक्षा के लिहाज से हर बड़े आयोजन स्थल पर अनिवार्य वीडियोग्राफी और गहन तलाशी व्यवस्था लागू होनी चाहिए। यदि भविष्य में किसी अप्रिय घटना के कारण जनहानि होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर पुलिस और स्थानीय नागरिक प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
पुलिस की कार्यप्रणाली और भविष्य की सुरक्षा पर सवाल
पुलिस विभाग की कार्यशैली पर भी उंगलियां उठ रही हैं क्योंकि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी इन हरकतों को रोकने में असमर्थ दिखते हैं। बिना किसी खौफ के हवाई फायरिंग करना यह दर्शाता है कि कानून का डर अपराधियों के मन से खत्म हो चुका है। अब यह अनिवार्य हो गया है कि आगामी सभी सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सवों में हथियारों के प्रवेश को पूर्णतः वर्जित किया जाए। प्रशासन को अपनी नींद से जागकर तुरंत सुरक्षा मानकों को जमीन पर उतारना होगा ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।
