Himachal News: हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में रिश्तों की मर्यादा शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां नगर परिषद संतोषगढ़ की एक महिला अपनी सास और जेठ की प्रताड़ना से तंग आकर न्याय की गुहार लगाने उपायुक्त कार्यालय पहुंची। पीड़ित महिला सुनीता देवी का आरोप है कि उसकी सास और जेठ ने पिछले एक महीने से घर की बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में महिला अपने तीन छोटे बच्चों के साथ अंधेरे में रहने और पानी के लिए भटकने को मजबूर है।
सास और जेठ पर गंभीर आरोप, बच्चों की पढ़ाई हुई बाधित
सुनीता देवी ने सोमवार को उपायुक्त को सौंपी गई अपनी शिकायत में मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का जिक्र किया है। महिला का कहना है कि वर्ष 2013 में कृष्ण कुमार से शादी के बाद से ही उसे परेशान किया जा रहा है। अब उसकी सास ने उसके मासूम बच्चों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। घर की बिजली कट जाने से बच्चे रात भर सो नहीं पा रहे हैं। इस कारण न केवल उनकी सेहत बिगड़ रही है, बल्कि उनकी स्कूल की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
बेरोजगारी की मार और अंधेरे में जीवन काटने की पीड़ा
12वीं पास और आईटीआई प्रशिक्षित सुनीता सिलाई-कढ़ाई के जरिए अपने परिवार की आय में सहयोग करती थी। बिजली न होने के कारण उसका यह रोजगार पूरी तरह ठप हो गया है। अब उसे परिवार का पेट पालने के लिए निजी फैक्ट्रियों में काम ढूंढने के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। सुनीता ने बताया कि उसके पति दिन भर कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन घर लौटने पर उन्हें सुखद नींद नसीब नहीं होती। पूरा परिवार पिछले एक महीने से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जी रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के घर पर भी मंडराया विवाद
हैरानी की बात यह है कि सुनीता को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए खुद सास ने ही एनओसी दी थी। मकान का निर्माण कार्य शुरू होने के बाद अब सास ने अपना रुख बदल लिया है और उसे लगातार तंग कर रही है। महिला का आरोप है कि उसने कई स्थानीय अधिकारियों से मदद मांगी, लेकिन कहीं भी उसकी सुनवाई नहीं हुई। अब हार मानकर उसे जिला मुख्यालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली-पानी की व्यवस्था तुरंत बहाल करवाई जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई और न्याय की उम्मीद
सुनीता की मार्मिक आपबीती सुनकर जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को समझा है। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग को जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। स्थानीय लोगों ने भी इस मामले में संवेदना जताई है और महिला के हक में खड़े हुए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस पारिवारिक कलह के बीच फंसे बच्चों को भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है। यह मामला समाज में महिलाओं के अधिकारों और पारिवारिक विवादों के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करता है।
