हिमाचल के शिक्षकों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, CBSE स्कूलों में पढ़ाने के लिए देनी होगी परीक्षा, रिजल्ट से हटी रोक

Himachal News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के शिक्षकों को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाने के लिए अनिवार्य छंटनी परीक्षा के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। इस बड़े फैसले के बाद अब शिक्षकों के रुके हुए परीक्षा परिणाम जल्द ही घोषित किए जा सकेंगे। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश के जरिए पहले इन परिणामों को जारी करने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी थी।

हाईकोर्ट ने छंटनी परीक्षा की योजना को माना बिल्कुल सही

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस अहम मामले पर अपना फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 19 जनवरी 2026 को अधिसूचित योजना में कोई भी कानूनी खामी नहीं है। कोर्ट ने इस परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह निष्पक्ष, न्यायसंगत, पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ करार दिया है। खंडपीठ ने माना कि इस सरकारी नीति में कुछ भी असंवैधानिक या मनमाना नहीं है। ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट की याचिका खारिज हो गई।

परिणाम घोषित करने पर लगी अदालत की रोक अब हटी

उच्च न्यायालय ने मामले में पहले एक सख्त अंतरिम आदेश पारित किया था। इसके तहत सरकार को परीक्षा प्रक्रिया जारी रखने की छूट मिली थी। हालांकि अदालत की पूर्व मंजूरी के बिना परीक्षा परिणाम घोषित करने पर पाबंदी लगाई गई थी। अब याचिकाएं खारिज होने के बाद यह रुकावट पूरी तरह दूर हो गई है। अदालत ने राज्य सरकार को शिक्षकों की अन्य जायज शिकायतों पर स्वतंत्र रूप से उचित निर्णय लेने की पूरी छूट प्रदान कर दी है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दी थी यह मुख्य दलील

शिक्षकों ने अदालत में कहा था कि नई योजना से भारी भ्रम पैदा हो रहा है। उनका दावा था कि परीक्षा में पास न होने पर सेवारत शिक्षकों का मनोबल गिरेगा। इससे राज्य का शैक्षणिक माहौल खराब होने का डर जताया गया। प्रार्थियों ने सेवारत शिक्षकों के लिए लिखित परीक्षा और काउंसलिंग की इस शर्त को पूरी तरह तर्कहीन बताया था। अदालत ने इन दावों को नकारते हुए शिक्षा विभाग के पक्ष को सही माना और याचिका खारिज कर दी।

शिक्षकों के अधिकारों के हनन का आरोप भी हुआ खारिज

प्रार्थियों ने कहा कि यह योजना एक वर्ग के भीतर दूसरा वर्ग बना रही है। रिटायरमेंट में तीन साल से अधिक समय वाले शिक्षकों को परीक्षा से रोका जा रहा है। उनका तर्क था कि चयनित शिक्षक बाद में मूल कैडर में लौट जाएंगे। इससे स्कूलों में पद खाली होंगे और बार-बार शिक्षकों का फेरबदल करना पड़ेगा, जिससे पढ़ाई बाधित होगी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन तमाम दलीलों को गैर-जरूरी मानते हुए खारिज कर दिया है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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