India Business News: भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अक्सर आम आदमी के मन में यह सवाल उठता है कि पंप मालिकों की कमाई कितनी होती है। कई लोग समझते हैं कि तेल महंगा होने से पंप मालिकों को मोटा मुनाफा होता है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल जुदा है। असल में, पेट्रोल पंप चलाने वालों का मुनाफा सरकार और तेल कंपनियों द्वारा तय एक निश्चित कमीशन पर आधारित होता है। यह मुनाफा हर लीटर की बिक्री के हिसाब से पहले से ही निर्धारित रहता है।
प्रति लीटर कितना मिलता है फिक्स कमीशन?
एक पेट्रोल पंप डीलर स्वयं तेल की कीमतें या अपना लाभ तय करने का अधिकार नहीं रखता। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी बड़ी तेल कंपनियां ही यह कमीशन निर्धारित करती हैं। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, एक पंप मालिक को पेट्रोल पर करीब 3 से 4 रुपये और डीजल पर लगभग 2 से 3 रुपये प्रति लीटर का कमीशन प्राप्त होता है। हाल ही में अक्टूबर 2024 में तेल कंपनियों ने कई वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इन मार्जिन में मामूली बढ़ोतरी की है।
कुल कमाई का बहुत छोटा हिस्सा ही मिलता है डीलर्स को
अगर आप पेट्रोल की खुदरा कीमत का विश्लेषण करेंगे, तो पाएंगे कि पंप मालिक का हिस्सा महज 3 से 5 प्रतिशत ही होता है। कमाई का एक बड़ा हिस्सा तेल की बेस कॉस्ट, केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार के वैट (VAT) में चला जाता है। एक खास फॉर्मूले के तहत पेट्रोल डीलर्स को लगभग 3,100 रुपये और डीजल डीलर्स को 2,300 रुपये प्रति किलोलीटर का कमीशन मिलता है। यह राशि अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों के मुकाबले काफी सीमित मानी जाती है।
भारी भरकम खर्चों के बोझ तले दबे पंप मालिक
कहने को तो हर लीटर पर कमीशन मिलता है, लेकिन एक पंप को चलाने के खर्चे भी बहुत विशाल हैं। इसमें कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल, मशीनों का रखरखाव और जमीन का भारी किराया शामिल होता है। इसके अलावा डिजिटल ट्रांजेक्शन चार्ज और कड़े सुरक्षा नियमों का पालन करने में भी बड़ी राशि खर्च होती है। शहरी क्षेत्रों में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे पंप मालिकों पर बोझ और बढ़ गया है। इन सभी खर्चों के बाद शुद्ध मुनाफा बहुत कम रह जाता है।
बिक्री की मात्रा यानी ‘वॉल्यूम’ पर टिका है पूरा बिजनेस
पेट्रोल पंप का व्यवसाय पूरी तरह से बिक्री की मात्रा यानी ‘वॉल्यूम’ पर निर्भर करता है। जिस पंप पर रोजाना जितना अधिक तेल बिकेगा, वहां के मालिक का मुनाफा उतना ही बेहतर होगा। कम बिक्री वाले आउटलेट्स के लिए आज के दौर में अपना अस्तित्व बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बढ़ती महंगाई और फिक्स कमीशन के कारण देश भर के डीलर समय-समय पर विरोध प्रदर्शन करते हैं। वे लगातार कमीशन बढ़ाने और व्यावसायिक सुविधाओं में सुधार की मांग सरकार के समक्ष रखते रहे हैं।
