New Delhi News: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन की अहम बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता किसी भी देश के लिए स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सभी सदस्य देशों से एकजुट होकर वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करने की जोरदार अपील की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांति बहाली के लिए हर संभव सहयोग का मजबूत भरोसा दिया है।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
भारत ने एससीओ मंच से आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को फिर से दोहराया है। रक्षा मंत्री ने साफ कहा है कि आतंकवादियों को पनाह देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराना बहुत जरूरी है। सीमा पार आतंकवाद से निपटना आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। भारत ने सदस्य देशों से खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को और ज्यादा मजबूत बनाने का आग्रह किया है। यह सामूहिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र में शांति भंग होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक मार्ग खतरे में पड़ गए हैं। भारत ने सभी विवादित पक्षों से कूटनीतिक बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकालने की जोरदार अपील की है। युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता है। संवाद ही एकमात्र रास्ता है।
आपसी रक्षा सहयोग पर जोर
इस अहम बैठक में रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर भी व्यापक चर्चा की गई है। भारत ने एससीओ देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा अनुसंधान बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि नई तकनीकों और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। इससे सभी सदस्य देशों की रक्षा प्रणालियां और अधिक मजबूत बनेंगी। आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति विकसित करना समय की मांग है।
