Iran News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने कूटनीतिक कदम उठाया है। उसने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का नया प्रस्ताव दिया है। बदले में वाशिंगटन को ईरानी बंदरगाहों से अपनी नाकेबंदी हटानी होगी। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिये अमेरिका पहुंचा है। ईरान ने फिलहाल परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा टालने की बात कही है। विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से आसमान छू रही हैं।
अमेरिका की कड़ी चेतावनी
ईरान के इस नए प्रस्ताव पर अमेरिका की प्रतिक्रिया बेहद सख्त रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस डील को आसानी से मानने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ किया है कि परमाणु मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए केवल तीन दिन का समय दिया है। उन्होंने कहा है कि तेल निर्यात बंद रहने से ईरानी पाइपलाइनों में दबाव बढ़ेगा। इससे वे फट सकती हैं और उन्हें दोबारा ठीक करना काफी मुश्किल होगा।
ईरान का कूटनीतिक प्रयास
तनाव कम करने के लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची लगातार विदेशी दौरे कर रहे हैं। पाकिस्तान और ओमान की यात्रा के बाद वह रूस पहुंच गए हैं। अरागची ने सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से खास मुलाकात की है। पुतिन ने इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने का पूरा भरोसा दिया है। ईरान अन्य देशों के साथ मिलकर अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। यह युद्ध रोकने की एक बड़ी कोशिश है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। लगातार बढ़ती तेल कीमतों ने देशों की चिंता बढ़ाई है। अमेरिका में आगामी चुनावों से पहले महंगाई ने ट्रंप प्रशासन पर भी दबाव डाला है। संयुक्त राष्ट्र ने इस गंभीर संकट पर अपनी चिंता जाहिर की है।
शांति वार्ता में फंसा पेंच
अमेरिका और ईरान की शांति वार्ता अधर में लटक रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने विशेष दूतों का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया है। उनका कहना है कि ईरान को बातचीत के लिए खुद आगे आना होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। बहरीन सहित कई देशों ने इस समुद्री मार्ग को तुरंत खोलने की मांग उठाई है। अब पूरी दुनिया की नजरें इन दोनों देशों के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।
