Delhi News: राजधानी दिल्ली में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की गई थी। यमुना किनारे बने बांसेरा में लोगों को हॉट एयर बलून की रोमांचक सवारी का सपना दिखाया गया था। लेकिन, यह अहम प्रोजेक्ट कुछ ही दिनों बाद पूरी तरह से फ्लॉप हो गया है। पूर्व उपराज्यपाल ने इस खास योजना का जोर-शोर से उद्घाटन किया था। यह शानदार गुब्बारा सिर्फ आठ से दस दिन बाद ही जमीन पर आ गिरा और स्थानीय लोगों की उम्मीदें टूट गईं।
भीषण गर्मी के कारण बंद हुई बलून राइड
दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए ने इस नाकामी के पीछे भीषण गर्मी का हवाला दिया है। अधिकारियों ने बताया कि हॉट एयर बलून गैस की तेज आग और गर्मी से उड़ता है। दिल्ली की जानलेवा गर्मी में इस राइड के भीतर का तापमान सहना आम इंसान के लिए नामुमकिन है। इसी कारण गर्मियों और मानसून के मौसम में इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। सर्दियों में इसके दोबारा शुरू होने की फिलहाल कोई पक्की गारंटी भी नहीं है।
महंगा किराया बना नाकामी का सबसे बड़ा कारण
इस राइड के फ्लॉप होने का मुख्य कारण अधिक किराया माना जा रहा है। दस मिनट की सवारी के लिए शुरुआत में तीन हजार रुपये फीस तय थी। बाद में खराब रिस्पांस देखकर इसे घटाकर तेईस सौ रुपये कर दिया गया। यह गुब्बारा जमीन से सिर्फ डेढ़ सौ फीट की ऊंचाई तक जाता था। रोमांच की कमी के कारण लोगों ने इससे पूरी तरह दूरी बना ली।
प्रदूषण और ऑनलाइन बुकिंग की कमी ने बिगाड़ा खेल
आधुनिक युग में जहां सभी चीजें ऑनलाइन उपलब्ध हैं, वहीं इस सवारी के लिए कोई ऑनलाइन बुकिंग सुविधा नहीं थी। इस वजह से लोगों को राइड चालू होने की सही जानकारी नहीं मिल पाती थी। सर्दियों के दौरान खतरनाक स्मॉग ने भी मज़ा पूरी तरह किरकिरा कर दिया। ऊंचाई से शहर के सुंदर नजारे देखने के बजाय लोगों को सिर्फ धुंध दिखाई दी। इसके अलावा बांसेरा में आयोजित अन्य कार्यक्रमों के कारण बलून राइड को बार-बार रोकना पड़ा।
अन्य प्रस्तावित परियोजनाओं के भविष्य पर भी उठे सवाल
डीडीए ने दिल्लीवालों को ऐसी शानदार सौगात कई अन्य प्रमुख स्थानों पर भी देने का वादा किया था। इनमें असिता, यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और राष्ट्रमंडल खेलगांव जैसे प्रमुख स्थान मुख्य रूप से शामिल थे। लेकिन बांसेरा हॉट एयर बलून प्रोजेक्ट की बुरी दुर्दशा को देखते हुए अब इन नए प्रोजेक्ट्स के भविष्य पर गहरे सवालिया निशान लग गए हैं। विभाग की खराब प्लानिंग और सुविधाओं की भारी कमी ने इस बहुप्रतीक्षित योजना को विफलता के रास्ते पर धकेल दिया है।
