Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जिला परिषदों पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा और सत्ताधारी कांग्रेस के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला होगा। वर्तमान में प्रदेश के नौ जिलों में भाजपा समर्थित अध्यक्ष काबिज हैं। वहीं केवल तीन जिलों में कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष मौजूद हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक साख और जनाधार साबित करने की पहली सबसे बड़ी परीक्षा है।
मंत्रियों और विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर
विधानसभा में इस समय कांग्रेस के चालीस और भाजपा के अठाईस विधायक मौजूद हैं। जिला परिषद के सदस्यों को चुनाव जिताने में इन सभी विधायकों की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री पर चुनाव जिताने का भारी दबाव है। शिमला जिले से मंत्री रोहित ठाकुर, अनिरुद्ध सिंह और विक्रमादित्य सिंह अपनी ताकत झोंकेंगे। सोलन से धनीराम शांडिल और बिलासपुर से राजेश धर्माणी भी अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने के लिए मैदान में डटे हैं।
बिना चुनाव चिह्न लड़े जाते हैं पंचायत चुनाव
हिमाचल में पंचायतीराज चुनाव सीधे तौर पर किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते हैं। सभी उम्मीदवार पूरी तरह से निर्दलीय के रूप में चुनावी मैदान में उतरते हैं। चुनाव जीतने के बाद ही इन सदस्यों का असली राजनीतिक रुझान सामने आता है। जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव के समय जोड़तोड़ की राजनीति अपने चरम पर पहुंच जाती है। भाजपा अपने मजबूत पुराने नेटवर्क के सहारे चुनाव लड़ रही है। वहीं कांग्रेस सत्ता का पूरा लाभ उठाने की कोशिश करेगी।
भाजपा का वर्चस्व तोड़ने की है बड़ी चुनौती
इस समय राज्य के अधिकांश जिलों में विपक्षी दल भाजपा का पुराना दबदबा कायम है। ऊना, मंडी, सिरमौर, बिलासपुर, सोलन, कांगड़ा, चंबा, किन्नौर और हमीरपुर में भाजपा समर्थित अध्यक्ष काबिज हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के पास सिर्फ लाहौल-स्पीति, कुल्लू और शिमला जिले की कमान है। भाजपा के लिए अपने पुराने गढ़ को हर हाल में बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं सत्ताधारी कांग्रेस इस मजबूत किले को भेदकर अपनी सियासी ताकत और जमीनी पकड़ मजबूत करने का पूरा प्रयास करेगी।
सुक्खू सरकार के लिए पहली बड़ी अग्निपरीक्षा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मौजूदा कार्यकाल में पहली बार पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव होने जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इन अहम चुनावों को सीधे तौर पर कांग्रेस सरकार के प्रदर्शन से जोड़कर देख रहे हैं। सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर पार्टी के भीतर चुनाव जीतने की खास रणनीति बन रही है। कांगड़ा जिले से मंत्री चंद्र कुमार और यादवेंद्र गोमा भी चुनाव जिताने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह सियासी घमासान और तेज होगा।
