इंद्रपुरी डकैती कांड का खुलासा: 70 लाख की लूट का मास्टरमाइंड निकला कंपनी का ही वफादार, पुलिस ने ऐसे दबोचा

New Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली के इंद्रपुरी इलाके में दिनदहाड़े हुई 70 लाख रुपये की सनसनीखेज डकैती की गुत्थी को पुलिस ने महज कुछ ही दिनों में सुलझा लिया है। पश्चिमी जिला पुलिस ने इस मामले में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए वारदात के मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी साजिश का ताना-बाना पीड़ित कंपनी के ही एक पुराने कर्मचारी ने बुना था, जिसने चंद रुपयों के लालच में अपनों को ही दगा दे दिया।

31 मार्च को हथियारों के बल पर हुई थी बड़ी लूट

यह सनसनीखेज वारदात बीती 31 मार्च की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे कृषि कुंज, इंद्रपुरी के पास घटित हुई थी। उस वक्त कंपनी के दो कर्मचारी 70 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी लेकर जा रहे थे। तभी मोटरसाइकिल पर सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने उनका रास्ता रोका और पिस्तौल की नोक पर रुपयों से भरा बैग छीनकर फरार हो गए। भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई इस वारदात ने पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे और व्यापारियों में दहशत का माहौल था।

कंपनी के कर्मचारी विकास ने ही रची थी साजिश

पुलिस की जांच के दौरान यह बात साफ हो गई थी कि बदमाशों को नकदी की सटीक लोकेशन और समय की पूरी जानकारी थी। टेक्निकल सर्विलांस और गहन छानबीन के बाद शक की सुई कंपनी के कर्मचारी विकास पर जाकर टिकी। पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की, तो परतें खुलती चली गईं। विकास ने ही अपने साथियों मोहम्मद कैफ, बीएस के छात्र ऋषि यादव और ऑटो चालक सौरभ उर्फ बच्चा के साथ मिलकर इस लूट की पूरी रूपरेखा तैयार की थी।

छापेमारी में 53.40 लाख रुपये नकद बरामद

पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त डीएस भास्कर ने बताया कि आरोपियों के पास से लूटी गई कुल रकम में से 53.40 लाख रुपये की नकदी बरामद कर ली गई है। इसके अलावा पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल को भी जब्त कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक ऋषि यादव स्नातक का छात्र है, जबकि सौरभ ऑटो चलाता है। पुलिस अब शेष रकम की बरामदगी और आरोपियों के पिछले आपराधिक रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी हुई है।

विशेष टीम ने दिल्ली-यूपी और हरियाणा में दी दबिश

इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए एसीपी मायापुरी इंद्रराज मीणा और इंद्रपुरी थाना प्रभारी कीर्ति यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। टीम ने घटनास्थल के आसपास के सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले और गुप्तचरों को सक्रिय किया। पुलिस की इस टीम ने दिल्ली के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। पुलिस की इस मुस्तैदी और तकनीकी तालमेल के कारण ही शातिर बदमाश कानून के शिकंजे से बच नहीं सके।

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