कांगड़ा में प्रकृति से भयंकर खिलवाड़: बिना मंजूरी काटे पहाड़, राधा स्वामी सत्संग ब्यास पर NGT का शिकंजा

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से पर्यावरण से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। राधा स्वामी सत्संग ब्यास परौर ने बिना अनुमति के ही पहाड़ों का सीना चीर दिया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को अपनी अहम रिपोर्ट सौंप दी है। 25 अप्रैल 2026 को पेश की गई इस रिपोर्ट में कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। संगठन ने निर्माण कार्यों और पहाड़ काटने के लिए टाउन प्लानिंग विभाग से कोई भी जरूरी मंजूरी नहीं ली थी।

स्थानीय ग्रामीणों की याचिका पर NGT की कार्रवाई

यह मामला स्थानीय ग्रामीणों की एक पत्र याचिका के बाद सामने आया। कांगड़ा के घनेटा, धोरन, बल्ला, परौर और दरांग गांवों के लोगों ने गंभीर आरोप लगाए। लोगों का कहना है कि संगठन दबाव बनाकर उनकी जमीनें लगातार छीन रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस शिकायत पर स्वतः संज्ञान लिया। आरोप है कि इस अवैध विस्तार से पूरे इलाके में बड़ा पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो रहा है। इसके कारण स्थानीय लोगों के बीच सामाजिक तनाव भी काफी अधिक बढ़ गया है।

जलस्रोतों में डाला गया मलबे का भारी ढेर

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त समिति ने 4 नवंबर 2025 को मौके का दौरा किया। जांच रिपोर्ट की तस्वीरें बेहद चिंताजनक सामने आईं। पहाड़ों को बहुत बुरी तरह से काटा जा चुका था। निर्माण से निकला मलबा सीधे प्राकृतिक जलस्रोतों में डाला जा रहा था। मलबे के कारण स्थानीय नालों का बहाव प्रभावित हो गया। उपग्रह से मिली तस्वीरों ने साबित कर दिया कि ताहल खड्ड और नाले की दिशा बदल दी गई है। यह प्रकृति के साथ एक बहुत गंभीर खिलवाड़ है।

सुरक्षा दीवारें कमजोर, मानसून में तबाही का खतरा

विभाग ने 7 अप्रैल 2026 को फिर से मौके की जांच की। जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। खड्ड और नाले के पास बनी सुरक्षा दीवारें बहुत कमजोर मिलीं। आगामी मानसून में ये दीवारें मलबे का दबाव नहीं सह पाएंगी। भारी बारिश में मलबा बहने से जल प्रदूषण का बड़ा खतरा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 10 और 17 अप्रैल को संगठन को नोटिस जारी किए हैं। उन्हें सुरक्षा दीवारें तुरंत मजबूत करने के बेहद सख्त निर्देश मिले हैं।

टाउन प्लानिंग विभाग से नहीं ली गई कोई अनुमति

पालमपुर टाउन प्लानिंग विभाग ने 13 अप्रैल 2026 को बड़ा खुलासा किया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि संगठन ने पहाड़ काटने की कोई अनुमति नहीं ली थी। विभाग पहले भी संगठन को कई चेतावनी पत्र भेज चुका है। बिना सरकारी मंजूरी के भूमि उपयोग में बदलाव और निर्माण पूरी तरह अवैध है। एनजीटी ने 27 फरवरी को अनुमतियों के सभी दस्तावेज मांगे थे। प्रदूषण बोर्ड ने नवंबर 2025 में केवल कुछ शर्तों के साथ अनापत्ति दी थी।

35 पेड़ों की अवैध कटाई पर सिर्फ 5000 का जुर्माना

इस मामले में 35 हरे पेड़ों की अवैध कटाई भी सामने आई है। जांच में स्पष्ट हुआ कि इन पेड़ों को गैरकानूनी रूप से काटा गया। प्रशासन ने इस बड़े अपराध पर मात्र 5,000 रुपये का मामूली जुर्माना लगाया है। काटे गए पेड़ों की असल कीमत इस जुर्माने से कई गुना अधिक है। इतनी कम सजा मिलने से विभागीय कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोग अब एनजीटी के अगले सख्त फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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