दिल्ली दंगा 2020: साक्ष्यों के अभाव में 12 आरोपित बरी, कोर्ट ने कहा- ‘गवाहों के बयानों में है गंभीर विरोधाभास’

New Delhi News: दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने फरवरी 2020 में हुए दंगों के दौरान एक व्यक्ति की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सबूतों की कमी और गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास को देखते हुए सभी 12 आरोपितों को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध को ‘संदेह से परे’ साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है।

संदेह का लाभ देकर आरोपियों को किया गया मुक्त

अदालत ने मामले की गंभीरता से जांच करने के बाद लोकेश सोलंकी, पंकज शर्मा, सुमीत चौधरी, अंकित चौधरी, प्रिंस, रिषभ, जतिन शर्मा, विवेक, हिमांशु ठाकुर, साहिल, टिंकू अरोड़ा और संदीप को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इन लोगों ने मुशर्रफ नामक व्यक्ति के घर में घुसकर हत्या की और शव को नाले में फेंक दिया था। मुशर्रफ का शव 27 फरवरी 2020 को बरामद हुआ था।

मुख्य गवाहों के बयानों पर कोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अभियोजन का पूरा मामला मृतक की पत्नी और बेटी के बयानों के इर्द-गिर्द घूम रहा था। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि इन गवाहों के बयानों में कई गंभीर विरोधाभास मौजूद हैं। अदालत ने मृतक की पत्नी के व्यवहार को भी ‘अस्वाभाविक’ करार दिया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि घटना देखने के बाद भी उन्होंने दो दिनों तक न तो पीसीआर (PCR) को फोन किया और न ही किसी रिश्तेदार को जानकारी दी।

सीडीआर नहीं बन पाया पुख्ता सबूत

अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की लोकेशन साबित करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का सहारा लिया था। हालांकि, कोर्ट ने इसे पर्याप्त सबूत मानने से इनकार कर दिया। न्यायाधीश ने कहा कि सीडीआर से केवल इतना सिद्ध होता है कि आरोपी उस समय अपने इलाके में मौजूद थे, जो कि उनका निवास स्थान भी है। केवल लोकेशन के आधार पर किसी व्यक्ति की अपराध में संलिप्तता साबित नहीं की जा सकती। साक्ष्यों के इसी अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया गया।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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