Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर जिले से प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा नमूना सामने आया है, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के उधाडीह गांव में अपराधियों ने साल 2006 में अनिल कुमार सिंह नामक व्यक्ति की लाइसेंसी राइफल लूट ली थी। चौंकाने वाली बात यह है कि हथियार पास न होने के बावजूद पिछले 17 वर्षों तक सरकारी कागजों में उस राइफल का नियमित सत्यापन और लाइसेंस का नवीनीकरण होता रहा। यह गंभीर चूक तब उजागर हुई जब पीड़ित खुद कोर्ट में गवाही देने पहुंचे।
अदालत में गवाही के दौरान खुला राज
प्रथम अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। गवाह के तौर पर पेश हुए लाइसेंसधारी अनिल कुमार सिंह ने न्यायाधीश के सामने सच उगल दिया। उन्होंने बताया कि उनकी राइफल 27 जनवरी 2006 को ही लूट ली गई थी, जो करीब 18 साल बाद दिसंबर 2024 में बरामद हुई। इस लंबे अंतराल के दौरान उन्होंने कोई दूसरा शस्त्र नहीं खरीदा, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उनका शस्त्र लाइसेंस हर साल रिन्यू होता रहा और अधिकारी उस पर अपनी मुहर लगाते रहे।
बिना हथियार कैसे हुआ भौतिक सत्यापन?
नियमों के मुताबिक, जिलाधिकारी द्वारा जारी किसी भी शस्त्र लाइसेंस का साल में कम से कम एक बार भौतिक सत्यापन अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में शस्त्र दंडाधिकारी या थानाध्यक्ष की मौजूदगी में हथियार की जांच की जाती है। भागलपुर के इस मामले ने पूरी प्रक्रिया की कलई खोलकर रख दी है। बिना राइफल देखे ही 17 साल तक कागजी खानापूर्ति होती रही। अदालत इस तथ्य को जानकर हैरान रह गई कि आखिर बिना हथियार प्रस्तुत किए प्रशासनिक अधिकारियों ने सत्यापन की रिपोर्ट कैसे और किसके इशारे पर लगा दी।
अपराधी के ठिकाने से मिली लूटी हुई राइफल
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह राइफल 13 दिसंबर 2024 को कुख्यात कनबुच्चा यादव गिरोह के एक सदस्य के घर से बरामद की गई थी। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि अपराधी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने हथियारों का जखीरा बरामद किया था, जिसमें अनिल सिंह की वही राइफल भी शामिल थी जो 2006 में छीनी गई थी। अब इस मामले ने समाहरणालय के शस्त्र विभाग और संबंधित पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
