Delhi News: राजधानी दिल्ली में लगातार हो रहे अग्निकांडों ने प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। उपराज्यपाल के सख्त निर्देशों के बावजूद रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में ‘फायर सुरक्षा ऑडिट’ का काम जमीनी स्तर पर नगण्य नजर आ रहा है। विवेक विहार में रविवार तड़के हुई हृदयविदारक घटना ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है। इस भीषण आग में नौ लोगों की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध निर्माण
विवेक विहार की जिस इमारत में यह हादसा हुआ, वहां सुरक्षा के बुनियादी मानकों की धज्जियां उड़ाई गई थीं। शुरुआती जांच में पता चला है कि करीब 800 गज में फैली इस इमारत में न तो पर्याप्त ‘फायर एग्जिट’ थे और न ही आग बुझाने के आवश्यक उपकरण। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन समय रहते सख्त ऑडिट करता, तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था। दिल्ली में उपहार सिनेमा और मुंडका जैसे बड़े हादसों के बाद भी सिस्टम ने अब तक कोई ठोस सबक नहीं लिया है।
जिम्मेदारी से बचते विभाग और कागजी कार्रवाई
दिल्ली में अग्निशमन विभाग और नगर निगम की संयुक्त जिम्मेदारी होने के बावजूद निरीक्षण प्रक्रिया में भारी ढिलाई देखी जा रही है। राजधानी की अधिकांश इमारतों में अवैध निर्माण, संकरी गलियां और आपातकालीन निकास का अभाव एक सामान्य बात हो गई है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बजाय, अक्सर निरीक्षणों को महज औपचारिकता तक सीमित कर दिया जाता है। जवाबदेही तय न होने के कारण मासूम लोगों को अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ रही है।
क्या है फायर सुरक्षा ऑडिट के नियम?
अग्नि सुरक्षा ऑडिट के दौरान मुख्य रूप से फायर एक्सटिंग्विशर, हाइड्रेंट और स्प्रिंकलर सिस्टम की जांच की जाती है। साथ ही बिजली की वायरिंग और लोड विश्लेषण भी बेहद महत्वपूर्ण होता है ताकि शॉर्ट सर्किट के खतरों को कम किया जा सके। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारी ऊंची इमारतों और व्यावसायिक इकाइयों का ऑडिट करते हैं। हालांकि, पारदर्शिता के लिए अब सरकार निजी एजेंसियों के माध्यम से भी ऑडिट करवा रही है, लेकिन इनका प्रभावी कार्यान्वयन अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
जवाबदेही तय करना समय की मांग
सुरक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि जब तक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आपराधिक मुकदमा और भारी जुर्माना नहीं लगाया जाएगा, स्थितियां नहीं बदलेंगी। रिहायशी क्षेत्रों में चल रही अवैध व्यावसायिक इकाइयां ‘मौत के जाल’ के समान हैं। प्रशासन को भ्रष्टाचार मुक्त और नियमित निरीक्षण प्रणाली विकसित करनी होगी। केवल मुआवजे की घोषणा और संवेदनाओं से ऐसे हादसों को नहीं रोका जा सकता। दिल्ली की जनता को सुरक्षित माहौल देने के लिए अब ठोस जमीनी कार्रवाई की सख्त जरूरत है।


