Himachal News: हिमाचल प्रदेश के टटियाना गांव में पंचायत चुनाव का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां बिना वोटिंग के ही पूरी पंचायत चुन ली गई है। महासू महाराज को साक्षी मानकर पर्ची व्यवस्था से प्रधान का फैसला हुआ है। इस प्रक्रिया ने राज्य में बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। शिमला के प्रसिद्ध समाजसेवी रवि कुमार दलित इसे निष्पक्ष चुनाव बिल्कुल नहीं मान रहे हैं। अब चुनाव आयोग से इस गंभीर मामले का तुरंत संज्ञान लेने की जोरदार मांग लगातार उठ रही है।
संविधान की भावना के खिलाफ है यह चुनावी प्रक्रिया
रवि कुमार दलित ने कहा कि पदों पर जिनकी नियुक्तियां हुई हैं, वे सभी सामान्य वर्ग से संबंध रखते हैं। चयन प्रक्रिया में अनुसूचित जाति का कोई भी नाम शामिल नहीं है। उन्होंने इसे संविधान की मूल भावना के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह राजशाही जैसी एक पुरानी और अलोकतांत्रिक व्यवस्था है। इससे आम आदमी के चुनाव लड़ने के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। पर्ची निकालते समय सभी जातियों के इच्छुक उम्मीदवारों को उचित जगह मिलनी चाहिए थी।
कौन कौन चुने गए
प्रधान पूनम शर्मा
उपप्रधान दाताराम शर्मा
बीडीसी के लिए प्रियंका शर्मा
चुनाव आयोग से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
रवि कुमार दलित ने इस तरह की चुनाव प्रक्रिया को सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। उनका कहना है कि राज्य चुनाव आयोग को तुरंत मामले की पुष्टि करनी चाहिए। उन्होंने टटियाना गांव की इस प्रक्रिया को असंवैधानिक घोषित करने की मांग उठाई है। रवि कुमार दलित का तर्क है कि देवता के नाम पर चुनी पंचायत का खर्च मंदिर खजाने से चलना चाहिए। अलोकतांत्रिक पंचायत पर सरकारी पैसा बिल्कुल खर्च नहीं होना चाहिए। प्रशासन को इस प्रकरण की तत्काल निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।


