हिमाचल में शहरी निकाय चुनाव बने सत्ता का सबसे बड़ा सेमीफाइनल, दिग्गजों की साख दांव पर, मचेगा सियासी घमासान

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव राजनीतिक तापमान बढ़ा चुके हैं। इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनावों का सीधा सेमीफाइनल माना जा रहा है। सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच यह एक सीधी टक्कर है। दोनों दल नगर निगम चुनावों में अपने पार्टी चिन्ह का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यह चुनाव राज्य की सियासत में और भी ज्यादा अहम हो गए हैं। पूरे राज्य की नजरें अब शहरी मतदाताओं के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।

मंडी, सोलन, पालमपुर और धर्मशाला में बड़ा सियासी घमासान

इस बार प्रदेश के चार प्रमुख नगर निगमों में सीधे चुनाव हो रहे हैं। इनमें मंडी, सोलन, पालमपुर और धर्मशाला शामिल हैं। साल 2021 के चुनावों में भाजपा ने धर्मशाला और मंडी में शानदार जीत दर्ज की थी। वहीं कांग्रेस ने पालमपुर और सोलन में अपना परचम लहराया था। उस समय प्रदेश में भाजपा की मजबूत सरकार थी। अब राज्य में कांग्रेस सत्ता चला रही है। इसलिए शहरी मतदाताओं का मूड अब सीधे तौर पर सत्ता के कामकाज पर बड़ी मुहर लगाएगा।

जीत पक्की करने के लिए मंत्रियों ने संभाला चुनावी मोर्चा

कांग्रेस ने इन चुनावों को पूरी तरह से अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। पार्टी ने जीत तय करने के लिए अपने कई वरिष्ठ मंत्रियों को मैदान में उतार दिया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर अब सोलन की चुनावी रणनीति संभाल रहे हैं। वहीं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को मंडी का बड़ा प्रभार मिला है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी पालमपुर में सक्रिय हैं। इसके अलावा एचपी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आरएस बाली को धर्मशाला निगम की जिम्मेदारी दी गई है।

भाजपा ने उतारे कद्दावर चेहरे, दांव पर बड़े दिग्गजों की साख

विपक्षी भाजपा ने भी जीत के लिए मजबूत चेहरों पर दांव खेला है। धर्मशाला में पवन काजल और सुधीर शर्मा मोर्चा संभाले हुए हैं। पालमपुर की जिम्मेदारी विपिन परमार और राजेश ठाकुर को मिली है। मंडी में पायल वैध और अनिल शर्मा पार्टी की जीत के लिए काम कर रहे हैं। सोलन में संजीव कटवाल और बलबीर वर्मा को यह काम सौंपा गया है। दोनों ही प्रमुख दल इस चुनाव में अपनी तरफ से कोई कसर बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहते हैं।

सुक्खू सरकार और मजबूत विपक्ष के बीच सीधा राजनीतिक टकराव

यह चुनाव सुक्खू सरकार के लिए एक बड़ा लिटमस टेस्ट हैं। जनता यह तय करेगी कि वह मौजूदा सरकार की नीतियों से कितनी संतुष्ट है। इस साल बजट में सरकार कोई खास राहत नहीं दे पाई थी। इसे लेकर विपक्ष लगातार तीखे हमले कर रहा है। कांग्रेस खराब आर्थिक स्थिति के लिए केंद्र के रवैये को दोष दे रही है। वहीं भाजपा इसे राज्य सरकार की विफलता बताकर चुनाव में सीधा सियासी फायदा उठाने की कोशिश में पूरी तरह से जुटी हुई है।

मतदान और मतगणना की नई तारीखों का हुआ अहम ऐलान

इस चुनावी समर में बावन शहरी निकायों के लिए मैदान सज गया है। इनमें चार नगर निगम, पच्चीस नगर परिषद और बाईस नगर पंचायत शामिल हैं। कुल चौदह सौ छब्बीस उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दाखिल कर दिए हैं। नाम वापसी की आखिरी तारीख छह मई तय की गई है। इसके बाद सत्रह मई को सुबह से वोटिंग शुरू हो जाएगी। नगर निगमों के नतीजे इकतीस मई को घोषित होंगे। इस बार तीन लाख मतदाता अपने मताधिकार का बड़ा प्रयोग करेंगे।

प्रदेश अध्यक्षों के लिए यह सबसे बड़ा राजनीतिक शक्ति परीक्षण

यह चुनाव राज्य के दो प्रमुख नेताओं के लिए उनकी साख की बड़ी लड़ाई है। कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार अपनी पहली बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। यह उनकी नेतृत्व क्षमता को साबित करने का सबसे अहम मौका है। दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल के लिए भी यह कड़ा इम्तिहान है। संगठन पर उनकी पकड़ और रणनीतिक कौशल को इन नतीजों से आंका जाएगा। जीत हार दोनों दलों की राजनीतिक दिशा तय करेगी।

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