Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में आर्थिक बदहाली अब सड़कों पर उतरने लगी है। सुक्खू सरकार के भारी कर्ज और वित्तीय कुप्रबंधन के दावों के बीच एचआरटीसी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। महीने की 12 तारीख बीतने के बाद भी हजारों कर्मियों के खाते खाली हैं। इस स्थिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राज्य की आर्थिक सेहत पर उठाए गए सवालों को दोबारा चर्चा में ला दिया है। अब कर्मचारी यूनियन ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के ड्राइवर-कंडक्टर यूनियन ने बड़ा खुलासा किया है। यूनियन के मुताबिक प्रदेश के 31 डिपो में से केवल 3 में वेतन मिला है। शेष 28 डिपो के कर्मचारी अब भी अपनी गाढ़ी कमाई का इंतजार कर रहे हैं। यह संकट तब और गहरा गया जब प्रधानमंत्री ने हाल ही में कहा था कि सरकार के पास वेतन देने के पैसे नहीं हैं। यूनियन ने प्रधानमंत्री के इस बयान को जमीनी हकीकत बताते हुए समर्थन दिया है।
HRTC यूनियन की दो जून से चक्का जाम की कड़ी चेतावनी
ड्राइवर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने निगम की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को नाइट अलाउंस, एरियर और मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं मिल रहा है। आलम यह है कि कई बार बसों के लिए डीजल भरवाने तक के पैसे नहीं होते। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि अगले महीने से एक तारीख को वेतन नहीं मिला, तो 2 जून से पूरे प्रदेश में बसों के पहिये थम जाएंगे।
वित्तीय दबाव के कारण मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहले ही वेतन कटौती का रास्ता चुना है। सरकार ने सीएम की सैलरी का 50 प्रतिशत और मंत्रियों-विधायकों की सैलरी का 30 प्रतिशत हिस्सा छह महीने के लिए रोकने का फैसला किया है। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों की 20 फीसदी सैलरी भी अस्थायी रूप से रोकी गई है। मुख्यमंत्री का तर्क है कि पिछली सरकारों की 13 हजार करोड़ की देनदारियों के कारण यह कठोर कदम उठाना पड़ा है।
एक लाख करोड़ के कर्ज में डूबा हिमाचल, सियासत चरम पर
हिमाचल प्रदेश पर कर्ज का बोझ अब एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। सुक्खू सरकार अपने कार्यकाल में अब तक 40 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज ले चुकी है। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर का आरोप है कि केंद्र की मदद से ही जैसे-तैसे वेतन दिया जा रहा है। सरकार ने राजस्व घाटा अनुदान कम होने का हवाला देकर बजट में भी भारी कटौती की है। इस राजनीतिक खींचतान के बीच आम कर्मचारी सबसे अधिक पिस रहा है।
कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने केंद्र सरकार पर हिमाचल के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पीएम मोदी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राज्य के हितों की अनदेखी की जा रही है। हालांकि, अधिकारी वर्ग को सैलरी डेफर के फैसले से राहत मिल गई है, लेकिन एचआरटीसी कर्मचारियों का गुस्सा बरकरार है। अब सबकी नजरें 2 जून की डेडलाइन पर टिकी हैं, जो हिमाचल की परिवहन व्यवस्था को ठप कर सकती है।

