West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने न केवल भारत बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रचंड जीत और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की करारी शिकस्त को जानकार बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पड़ोसी मुल्क में भड़की हिंसा और उस पर ममता बनर्जी की चुप्पी ने बंगाल के मतदाताओं के बीच एक निर्णायक भूमिका निभाई, जिसने चुनावी गणित को पूरी तरह बदल दिया।
हिंदुओं पर अत्याचार और ममता की चुप्पी का चुनावी कनेक्शन
बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी। इस दौरान अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। उस वक्त पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे अंतरराष्ट्रीय मामला बताकर कोई भी आधिकारिक बयान देने से परहेज किया था। बीजेपी ने ममता की इस चुप्पी को ‘मुस्लिम परस्त’ राजनीति और तुष्टीकरण का हिस्सा बताकर राज्य में एक नया चुनावी नैरेटिव पेश किया।
बीजेपी का ‘सनातन कार्ड’ और ध्रुवीकरण का पैटर्न
पूरे चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने ममता बनर्जी पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने का गंभीर आरोप लगाया। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी रैलियों में बांग्लादेशी हिंदुओं पर हुए अत्याचारों का मुद्दा उठाकर मतदाताओं को जागरूक किया। इस रणनीति का असर यह हुआ कि बंगाल का चुनाव पूरी तरह से ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’ पैटर्न पर शिफ्ट हो गया। मतदाताओं ने ‘सनातन’ की रक्षा के नाम पर मतदान किया, जिससे बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिली और टीएमसी को भारी नुकसान हुआ।
बांग्लादेश की नई सरकार और बीजेपी से नजदीकी की कोशिश
बांग्लादेश में हाल ही में हुए चुनाव के बाद अब वहां खालिदा जिया की पार्टी ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (बीएनपी) सत्ता में है। चौंकाने वाली बात यह है कि बीएनपी, जिसने हिंदुओं पर अत्याचार के समय चुप्पी साधी थी, अब बंगाल में बीजेपी की जीत पर खुशी जता रही है। ढाका में बीएनपी के सूचना सचिव अज़ीज़ुल बारी हेलाल ने संभावित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बधाई भेजी है। बीएनपी अब शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार से मधुर संबंध बनाने और तीस्ता जल विवाद जैसे मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
तीस्ता बैराज समझौते पर अब टिकीं सबकी नजरें
बीएनपी नेता अज़ीज़ुल बारी हेलाल ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी को भारत-बांग्लादेश संबंधों में रुकावट बताया। हेलाल ने कहा कि तीस्ता बैराज के निर्माण में अब तक ममता बनर्जी ही सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थीं। बीएनपी को उम्मीद है कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार तीस्ता बैराज समझौते को आगे बढ़ाएगी, जिसकी जरूरत मोदी सरकार और बांग्लादेश दोनों को है। हालांकि, वैचारिक मतभेदों के बावजूद बीएनपी अब भारत के साथ सामान्य संबंध और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देने का संकेत दे रही है।
बदले हुए सियासी समीकरण और भविष्य की चुनौतियां
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। बीएनपी का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी की जीत से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जैसे पुराने विवादों का समाधान निकलेगा। लेकिन दूसरी ओर, बीजेपी के कट्टर रुख और बीएनपी के पुराने इतिहास को देखते हुए संबंधों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र की मोदी सरकार और बंगाल की नई सरकार मिलकर बांग्लादेश के साथ इन द्विपक्षीय संबंधों को किस दिशा में ले जाती है।


