Tamil Nadu News: तमिलनाडु की राजनीति में आए एक बड़े बदलाव के साथ ही सोशल मीडिया पर एक नई जंग छिड़ गई है। अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ उनकी एक इंस्टाग्राम रील चर्चा का विषय बन गई। ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) प्रमुख विजय और राहुल गांधी की इस वीडियो सामग्री को मेटा द्वारा कथित तौर पर ब्लॉक किए जाने के बाद देश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी 10 मई रविवार को विजय के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने चेन्नई पहुंचे। इस ऐतिहासिक मौके पर दोनों नेताओं की मुलाकात की कुछ तस्वीरें और एक रील इंस्टाग्राम पर साझा की गई थी। देखते ही देखते यह रील सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गई। हालांकि, कांग्रेस ने जल्द ही दावा किया कि प्लेटफॉर्म ने इस लोकप्रिय रील को अचानक ब्लॉक कर दिया है।
राहुल गांधी के करीबी सहयोगी श्रीवत्स ने इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस रील को महज एक घंटे के भीतर 1.2 करोड़ से अधिक व्यूज मिल चुके थे। वहीं, दोनों नेताओं की फोटो पोस्ट भी करीब 4.6 करोड़ लोगों तक पहुँच चुकी थी। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के दबाव या कड़े सरकारी नियमों के चलते मेटा ने इस सामग्री को हटाया है।
सरकार का हस्तक्षेप या एल्गोरिदम की चूक?
कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया है। पार्टी का मानना है कि वायरल कंटेंट को जानबूझकर सेंसर किया गया ताकि विपक्षी नेताओं की लोकप्रियता को कम किया जा सके। इस बीच, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों ने इन गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस पूरी कार्रवाई में सरकार की कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा के आंतरिक सिस्टम की एक सामान्य तकनीकी त्रुटि थी। बताया गया कि प्लेटफॉर्म के स्वचालित सुरक्षा सिस्टम ने पोस्ट को गलती से ‘फ्लैग’ (Flag) कर दिया था, जिसके कारण वह ब्लॉक हो गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक तकनीकी गड़बड़ी थी। अब इस त्रुटि को मेटा द्वारा सुधार लिया गया है और राहुल गांधी की पोस्ट को फिर से बहाल कर दिया गया है।
भले ही तकनीकी रूप से पोस्ट वापस आ गई है, लेकिन तमिलनाडु से शुरू हुआ यह विवाद अब दिल्ली की गलियारों तक पहुँच गया है। राजनीति के जानकार इसे थलापति विजय की बढ़ती राजनीतिक ताकत और कांग्रेस के साथ उनके समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। विजय ने हाल ही में अपनी पार्टी ‘टीवीके’ का गठन किया है और पहले ही प्रयास में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचकर उन्होंने सबको चौंका दिया है।
सोशल मीडिया की यह सेंसरशिप अब एक बड़े बहस का मुद्दा बन गई है। क्या वाकई तकनीकी कंपनियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं या उन पर अदृश्य राजनीतिक दबाव होता है? राहुल गांधी और विजय के बीच की यह केमिस्ट्री आने वाले समय में तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल, दोनों नेताओं के समर्थक इस रील के बहाल होने से खुश हैं, लेकिन विवाद की आंच अभी ठंडी नहीं हुई है।


