Himachal News: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे विभाग में किए गए ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की जीत बताया है। इस वर्ष मेरिट सूची के टॉप-100 में आधे से अधिक स्थान सरकारी स्कूलों के बच्चों ने हासिल किए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, सही मार्गदर्शन मिलने पर सरकारी स्कूलों के छात्र किसी भी निजी संस्थान से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।
सरकारी स्कूलों के पास प्रतिशत में भारी उछाल
शिक्षा क्षेत्र में हुए सुधारों का असर पास प्रतिशत में भी साफ दिखाई दे रहा है। इस वर्ष सरकारी स्कूलों का उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़कर 92.02 फीसदी तक पहुंच गया है। पिछले वर्षों की तुलना में यह एक बड़ी छलांग है। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 88.64 प्रतिशत और 2024 में मात्र 73.76 प्रतिशत था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अब गुणात्मक शिक्षा के मामले में देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हो गया है।
भवारना स्कूल के अंशित बने ओवरऑल टॉपर
कई वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस बार ओवरऑल टॉपर सरकारी स्कूल से आया है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भवारना के छात्र अंशित कुमार ने 99.20 प्रतिशत अंक पाकर इतिहास रच दिया। उनकी इस उपलब्धि ने साबित किया कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता अब निजी संस्थानों के बराबर है। मुख्यमंत्री ने छात्र की मेहनत की सराहना करते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरव का पल बताया है। यह सफलता अन्य छात्रों को भी प्रेरित करेगी।
मेरिट सूची में छात्राओं का शानदार प्रदर्शन
इस वर्ष की मेरिट सूची में छात्राओं ने छात्रों की तुलना में अधिक स्थान बनाए हैं। टॉप-100 की सूची में इस बार 48 छात्राओं और 10 छात्रों ने अपनी जगह पक्की की है। पिछले वर्ष की तुलना में छात्राओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। वर्ष 2025 में यह संख्या 41 छात्राओं और 9 छात्रों की थी। यह आंकड़े प्रदेश में महिला साक्षरता और उनकी शैक्षणिक प्रगति की एक सुखद तस्वीर पेश करते हैं।
साक्षरता और शिक्षा रैंकिंग में हुआ सुधार
मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य पहले 21वें स्थान पर खिसक गया था। वर्तमान सरकार के प्रयासों से हिमाचल अब पूर्ण साक्षर राज्य बन चुका है। शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्कूलों में नई तकनीक अपनाई जा रही है। इससे आने वाले समय में शैक्षणिक परिणामों में और भी अधिक सकारात्मक सुधार होने की पूरी उम्मीद जताई गई है।


