हिमाचल के थानों में सड़ रहे लावारिस सामानों की अब खैर नहीं, पुलिस मुख्यालय ने लिया बड़ा फैसला! क्या बदलेगी थानों की तस्वीर?

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने थानों के मालखानों में वर्षों से जमा लावारिस और जब्त संपत्तियों को लेकर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है। इसके तहत अब थानों में पड़े हर सामान की डिजिटल मॉनीटरिंग होगी। तय समय सीमा के भीतर इन संपत्तियों का निपटारा करना अब अनिवार्य होगा। इस प्रशासनिक सुधार से पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

प्रदेश के थानों में लंबे समय से जब्त वाहन और पुराने मामलों का सामान कबाड़ बन रहा था। इससे न केवल जगह की कमी होती थी, बल्कि रिकॉर्ड प्रबंधन में भी बड़ी बाधा आती थी। अब नई व्यवस्था के तहत किसी भी वस्तु को कब्जे में लेते ही उसकी फोटो और विवरण सीसीटीएनएस पोर्टल पर अपलोड करना होगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने से सामान के गायब होने या रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज

नई एसओपी में समयबद्ध कार्रवाई पर विशेष जोर दिया गया है। खराब होने वाली वस्तुओं का निपटारा अब मात्र 48 घंटे के भीतर किया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित जिले के एसपी या एसडीपीओ की अनुमति लेनी होगी। सामान्य लावारिस सामान के लिए 15 दिनों का सार्वजनिक नोटिस जारी किया जाएगा। यदि इस अवधि में कोई दावेदार नहीं आता, तो संपत्ति की नीलामी या निपटान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

थानों में खड़े लावारिस वाहनों को 90 दिनों के भीतर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर हटाना होगा। मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी ने इसमें देरी या लापरवाही बरती, तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई होगी। पुलिस महानिदेशक ने सभी जिला अधीक्षकों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए हैं। इस व्यवस्था से अदालती मामलों से जुड़े साक्ष्यों का रिकॉर्ड भी अब डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा।

पारदर्शिता के लिए हर जिले में बनेगी डिस्पोजल कमेटी

नीलामी की प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए प्रत्येक जिले में एसपी की अध्यक्षता में ‘डिस्पोजल कमेटी’ का गठन होगा। इस कमेटी में पुलिस के साथ प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित थाना प्रभारी सदस्य होंगे। यह टीम पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी ताकि कोई अनियमितता न हो। नीलामी से प्राप्त होने वाली सारी राशि सीधे सरकारी खजाने में जमा की जाएगी। इससे राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

डिजिटल मॉनीटरिंग के तहत रेंज स्तर पर आईजी हर महीने कार्यों की समीक्षा करेंगे। प्रत्येक माह की 7 तारीख तक विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजनी होगी। हालांकि, मादक पदार्थ, हथियार और विस्फोटक जैसे संवेदनशील मामलों में एनडीपीएस और एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत अलग नियम लागू होंगे। इस नई पहल से थानों की तस्वीर बदलने और जनता को अपनी खोई हुई चीजें वापस मिलने में आसानी होगी।

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