Telangana News: प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी और समाज में मिलने वाला ऊंचा रसूख छोड़ना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन एक जांबाज अधिकारी ने अपने फिल्मी सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दशकों पुराने करियर को दांव पर लगा दिया। 1982 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पापा राव बियाला ने व्यवस्था के सबसे ऊंचे पदों पर रहते हुए भी कला को अपनी प्राथमिकता बनाया। उन्होंने साबित किया कि अगर संकल्प दृढ़ हो, तो सफलता किसी भी क्षेत्र में मिल सकती है।
प्रशासनिक गलियारों से फिल्म निर्माण के सेट तक का सफर
बीवीपी राव के नाम से मशहूर पापा राव बियाला का करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने असम में गृह सचिव जैसे संवेदनशील पद की जिम्मेदारी बखूबी निभाई थी। इसके अलावा उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के तहत कोसोवो में भी अपनी सेवाएं दीं। तेलंगाना सरकार में उन्हें नीति सलाहकार के रूप में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला हुआ था। इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद उनके भीतर का कलाकार हमेशा सक्रिय रहा और वे अक्सर रचनात्मक कार्यों के लिए समय निकालते रहे।
टॉम ऑल्टर और जाह्नू बरुआ से मुलाकात ने बदली जिंदगी
90 के दशक में मशहूर अभिनेता टॉम ऑल्टर के जरिए उनकी मुलाकात राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक जाह्नू बरुआ से हुई। इस मुलाकात ने पापा राव के जीवन की दिशा बदल दी और उनके भीतर फिल्म निर्माण की इच्छा जाग उठी। उन्होंने व्यस्त प्रशासनिक ड्यूटी के दौरान ही 1996 में न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी से फिल्म मेकिंग का डिप्लोमा किया। इसके बाद उन्होंने ‘विलिंग टू सैकरीफाइस’ नामक डॉक्यूमेंट्री बनाई, जिसने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतकर सबको उनकी प्रतिभा का लोहा मानने पर मजबूर कर दिया।
इस्तीफा देकर बनाई ‘म्यूजिक स्कूल’ जैसी प्रशंसित फिल्म
सिनेमा के प्रति अपने जुनून को पूरा करने के लिए पापा राव ने साल 2020 में भारतीय खेल प्राधिकरण से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह से खुद को निर्देशन और लेखन में समर्पित कर दिया। साल 2023 में उनकी पहली फीचर फिल्म ‘म्यूजिक स्कूल’ रिलीज हुई। इलैयाराजा के संगीत और श्रिया सरन व शरमन जोशी के अभिनय से सजी इस फिल्म ने खूब सुर्खियां बटोरीं। यह फिल्म शिक्षा व्यवस्था के दबाव के बीच बच्चों की रचनात्मकता के खत्म होने पर आधारित थी।
प्रशासनिक तनाव से बेहतर फिल्म निर्माण का अनुभव
पापा राव बियाला का मानना है कि फिल्मों में काम करना प्रशासनिक सेवा की तुलना में काफी सुकून भरा है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि प्रशासन में प्रधानमंत्री की सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों का प्रबंधन करना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। इसके मुकाबले फिल्म निर्माण उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की पूरी आजादी और रचनात्मक संतोष देता है। फिलहाल वे अपनी नई फिल्म की पटकथा पर काम कर रहे हैं और जल्द ही अपने अगले प्रोजेक्ट की आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं।


