हिमाचल में 6200 शिक्षकों की भर्ती पर गहराया संकट: क्या चुनाव के फेर में फंस जाएगी आपकी नियुक्ति?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 6200 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर चुनावी ग्रहण लग गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर काउंसिलिंग प्रक्रिया स्थगित करने का सुझाव दिया है। आयोग का तर्क है कि चुनाव ड्यूटी के कारण विभाग के पास स्टाफ की कमी है। ऐसे में काउंसिलिंग जारी रखने से चुनावी कार्यों में बाधा आ सकती है। इस निर्देश के बाद उन हजारों अभ्यर्थियों में चिंता की लहर है, जो लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

चुनाव आयोग का हस्तक्षेप और शिक्षा विभाग की मुश्किलें

राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पंचायत और निकाय चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रदेशभर के शिक्षकों और अधिकारियों की ड्यूटी चुनाव प्रबंधन में लगाई गई है। ऐसी स्थिति में काउंसिलिंग जैसी लंबी प्रक्रिया को पूरा करना विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। शिक्षा विभाग ने अब इस तकनीकी पेच को प्रदेश सरकार के समक्ष रखा है। मुख्यमंत्री ने इसी महीने भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए थे, लेकिन आयोग के रुख से अब नियुक्तियां लटकती नजर आ रही हैं।

इन श्रेणियों के पदों पर होनी है बड़ी नियुक्तियां

शिक्षा विभाग ने विभिन्न श्रेणियों के खाली पदों को भरने के लिए काउंसिलिंग की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली थी। इसमें प्रधानाचार्यों के अलावा प्रवक्ता, टीजीटी, सीएंडवी, डीपीई, पीईटी और जेबीटी जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। विभाग ने प्रधानाचार्य पद के लिए पांच और छह मई को काउंसिलिंग की प्रारंभिक औपचारिकताएं पूरी भी कर ली थीं। अब शेष श्रेणियों के लिए आयोग से अनुमति मांगी गई है। अभ्यर्थियों को डर है कि देरी होने से स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता है।

सीबीएसई स्कूलों के लिए बनाए गए थे नौ विशेष केंद्र

प्रदेश के 145 सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए निदेशालय ने कमर कसी थी। काउंसिलिंग के लिए शिमला में नौ विशेष केंद्र बनाए गए और 10 हाई-प्रोफाइल कमेटियां गठित की गईं। इन कमेटियों में शिक्षा विभाग के संयुक्त और उप निदेशकों को शामिल किया गया है। विभाग ने शुरुआत में 20 मई तक सभी औपचारिकताएं पूरी करने की समय-सीमा तय की थी। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए राजधानी के कई प्रतिष्ठित स्कूलों को केंद्र के रूप में चुना गया था।

इन प्रमुख केंद्रों पर होनी थी काउंसिलिंग की प्रक्रिया

भर्ती प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए शिमला के लालपानी, छोटा शिमला और पोर्टमोर जैसे स्कूलों को मुख्य केंद्र बनाया गया है। इसके अलावा फागली, समरहिल, शोघी, लक्कड़ बाजार और संजौली स्कूलों में भी कमेटियां तैनात की गई थीं। चार मई को हुई उच्च स्तरीय बैठक में भर्ती को लेकर कड़े निर्देश दिए गए थे। अब सारा दारोमदार चुनाव आयोग की अंतिम अनुमति पर टिका है। यदि अनुमति नहीं मिली, तो अभ्यर्थियों को आचार संहिता खत्म होने तक लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

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