Mumbai News: शूटिंग के दौरान कैमरे के सामने एक बोर्ड नजर आता है। फिल्म क्रू इसे चटकाते हुए दिखाई देते हैं। दर्शक इसे महज एक सामान्य प्रक्रिया मानते हैं। लेकिन वास्तव में यह उपकरण फिल्म निर्माण का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस खास बोर्ड के बिना फिल्म एडिटर सटीक एडिटिंग बिल्कुल नहीं कर सकते। तकनीकी भाषा में लोग इसे क्लैपबोर्ड कहते हैं। आज हम फिल्म निर्माण में क्लैपबोर्ड के असली काम और महत्व को बहुत ही विस्तार से समझेंगे।
क्लैपबोर्ड का असली नाम और फिल्म शूटिंग में इसका काम
शूटिंग के समय उपयोग होने वाले इस बोर्ड को लोग क्लैपबोर्ड या क्लैपरबोर्ड कहते हैं। शुरुआती दौर में फिल्म निर्माता पूरी तरह से ब्लैक एंड व्हाइट बोर्ड का उपयोग करते थे। आजकल के आधुनिक क्लैपबोर्ड काफी आकर्षक और डिजिटल होते हैं। निर्माता इन पर रंग-बिरंगी धारियां भी बनाते हैं। पुराने समय में कैमरे ऑडियो और वीडियो एक साथ रिकॉर्ड नहीं करते थे। इसलिए क्रू मेंबर शॉट शुरू होने से पहले इस बोर्ड को जोर से चटकाते थे।
ऑडियो और वीडियो सिंकिंग में क्लैपबोर्ड की अहम भूमिका
वर्तमान में फिल्म निर्माता शूटिंग के लिए बेहद आधुनिक डिजिटल कैमरे इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कुछ दशक पहले तक ऑडियो और वीडियो को एक साथ सिंक करना संभव नहीं था। इसलिए क्रू मेंबर क्लैपबोर्ड को चटकाकर एक तेज आवाज पैदा करते थे। यह तेज आवाज एडिटिंग सॉफ्टवेयर या टेप में एक ऑडियो स्पाइक बना देती थी। बाद में फिल्म एडिटर इसी स्पाइक को देखकर वीडियो के विजुअल और ऑडियो को बिल्कुल एक साथ मैच कर लेते थे।
बोर्ड पर लिखी बारीक जानकारियों का पोस्ट प्रोडक्शन में महत्व
आपने अक्सर क्लैपबोर्ड पर फिल्म या डॉक्यूमेंट्री का नाम लिखा देखा होगा। इसके अलावा क्रू मेंबर इस पर सीन का नंबर, टेक नंबर और रोल नंबर भी लिखते हैं। डायरेक्टर यह सारी जरूरी जानकारी एडिटर की सुविधा के लिए लिखवाते हैं। इन जानकारियों को पढ़कर एडिटर तुरंत समझ जाते हैं कि वे किस सीन पर काम कर रहे हैं। उन्हें पता चल जाता है कि फिल्म का डायरेक्टर कौन है और शॉट्स को किस क्रम में जोड़ना है।
रंगीन धारियों का वैज्ञानिक उपयोग और कलर ग्रेडिंग प्रक्रिया
अब यह जानना बहुत जरूरी है कि क्लैपबोर्ड पर रंगीन धारियां क्यों होती हैं। पुराने जमाने की सभी फिल्में ब्लैक एंड व्हाइट होती थीं। इसलिए उन फिल्मों में रंगों का कोई काम नहीं था। आधुनिक फिल्मों में यह रंगीन स्ट्रिप एडिटर और डायरेक्टर की काफी मदद करती है। इस स्ट्रिप को देखकर एडिटर पूरी फिल्म की कलर टोन आसानी से मैच कर लेते हैं। अगर वे ऐसा न करें, तो अलग-अलग दृश्यों में रंगों का खराब अंतर दिखाई देने लगेगा।
आधुनिक सिनेमा में डिजिटल स्मार्ट स्लेट का बढ़ता प्रचलन
समय के साथ क्लैपबोर्ड की तकनीक में भी काफी बड़े बदलाव आए हैं। आजकल हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों में निर्देशक डिजिटल स्मार्ट स्लेट का खूब इस्तेमाल करते हैं। इन आधुनिक स्लेट्स में एक एलईडी डिस्प्ले लगा होता है। यह डिस्प्ले कैमरे और ऑडियो रिकॉर्डर दोनों से सीधे जुड़ा रहता है। इससे फिल्म एडिटर अपना एडिटिंग का काम पहले से काफी तेजी और सटीकता से करते हैं। तकनीक बदलने के बावजूद क्लैपबोर्ड आज भी सिनेमा का सबसे अहम हिस्सा है।

