Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की एक होनहार बेटी ने अपनी शैक्षणिक प्रतिभा से पूरे प्रदेश का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया है। नूरपुर क्षेत्र के एक छोटे से गांव परगना की रहने वाली वर्षा मनकोटिया ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। वर्षा ने बीबीए (2022-25) की परीक्षा में विश्वविद्यालय स्तर पर टॉप कर गोल्ड मेडल हासिल किया। एक फौजी पिता की बेटी ने साबित कर दिया कि बुलंद हौसलों से किसी भी मुकाम को पाया जा सकता है।
राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में प्रदान किया स्वर्ण पदक
सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में आयोजित दीक्षांत समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने मेधावी छात्रों को सम्मानित किया। इस गरिमामय कार्यक्रम के दौरान द्रोणाचार्य शिक्षण महाविद्यालय रैत की छात्रा वर्षा मनकोटिया को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। राज्यपाल ने मेधावियों को डिग्रियां प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल की युवा पीढ़ी शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।
फौजी पिता और गृहिणी मां की मेहनत लाई रंग
वर्षा की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट सहयोग और त्याग छिपा है। उनके पिता सुरजीत सिंह भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, जबकि माता सीमा देवी एक कुशल गृहिणी हैं। एक फौजी परिवार के अनुशासित माहौल ने वर्षा को कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित किया। बेटी की इस उपलब्धि की खबर मिलते ही गांव परगना में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने इसे पूरे नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताया है।
महाविद्यालय और शिक्षकों के मार्गदर्शन की अहम भूमिका
द्रोणाचार्य शिक्षण महाविद्यालय रैत के प्रबंधन ने वर्षा की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह उपलब्धि छात्रा की एकाग्रता, शिक्षकों के सटीक मार्गदर्शन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण का परिणाम है। शिक्षकों ने बताया कि वर्षा शैक्षणिक गतिविधियों में हमेशा सक्रिय रहती थीं। महाविद्यालय ने अन्य छात्राओं को भी वर्षा से प्रेरणा लेने का आह्वान किया है। वर्षा ने अपने कॉलेज का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया है।
शिक्षा एक निरंतर प्रक्रिया: राज्यपाल का संबोधन
समारोह के दौरान राज्यपाल ने ‘दीक्षांत’ और ‘शिक्षांत’ के दार्शनिक अर्थों की गहराई से व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा कभी समाप्त नहीं होती, बल्कि यह जीवन भर चलने वाली एक सतत प्रक्रिया है। राज्यपाल ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का होना भी अनिवार्य है। उन्होंने वर्षा जैसी बेटियों की सराहना की, जो ग्रामीण क्षेत्रों की सीमाओं को लांघकर सफलता के शिखर तक पहुंच रही हैं।
वर्षा का अगला लक्ष्य: क्षेत्र का नाम रोशन करना
अपनी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए वर्षा मनकोटिया ने बताया कि वह वर्तमान में नौकरी कर रही हैं। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और अपने महाविद्यालय को दिया है। वर्षा ने कहा कि वह भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करना चाहती हैं ताकि उनके परिवार और नूरपुर क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमके। आज वर्षा हिमाचल की हजारों बेटियों के लिए एक जीवंत मिसाल बन चुकी हैं, जो छोटे गांवों से बड़े सपने देखती हैं।

