Business News: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबारी हफ्ते की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण घरेलू सूचकांकों में तगड़ी बिकवाली देखी गई। बीएसई सेंसेक्स 854.68 अंक या 1.11% लुढ़ककर 76,473.51 के स्तर पर आ गया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 235 अंक या 0.97% गिरकर 23,941.15 पर खुला। बाजार में आई इस अचानक गिरावट से निवेशकों में खौफ का माहौल है। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग और आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव नजर आया।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख और नया रिकॉर्ड
दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच एशियाई बाजारों में उतार-चढ़ाव दिखा। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 0.81% की तेजी के साथ कारोबार करता नजर आया। दक्षिण कोरिया के कोप्सी इंडेक्स ने सोमवार को कमाल करते हुए 3.67% की छलांग लगाई और नए रिकॉर्ड स्तर को छुआ। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक निवेशकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा और 0.71% तक नीचे गिर गया।
अमेरिकी वायदा बाजार में मंदी का असर
सोमवार के शुरुआती कारोबार में अमेरिकी शेयर वायदा बाजार में मंदी का रुख बना हुआ है। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज से जुड़े वायदा बाजार में 189 अंकों यानी लगभग 0.3% की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञ इस गिरावट को आगामी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक अनिश्चितता से जोड़कर देख रहे हैं। अमेरिकी बाजार की इस कमजोरी का सीधा असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी पड़ा है। कारोबारी अब सावधानी बरत रहे हैं और जोखिम भरे निवेश से बच रहे हैं।
पिछले सत्र में अमेरिकी बाजार की बढ़त बेअसर
बीते शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे, लेकिन सोमवार को यह तेजी बरकरार नहीं रही। शुक्रवार को नैस्डैक कंपोजिट 1.71% या 440.88 अंक बढ़कर 26,247.08 पर पहुंच गया था। वहीं, एसएंडपी 500 भी 0.84% चढ़कर 7,398.93 के स्तर पर स्थिर हुआ था। डाउ जोन्स में 12.19 अंकों की मामूली बढ़त देखी गई थी। हालांकि, आज के वायदा कारोबार में आई गिरावट ने इन सकारात्मक संकेतों को पूरी तरह से दबा दिया है।
कच्चे तेल की कीमतें और तनाव बना चिंता का कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय बाजार के लिए बड़ी चुनौती हैं। मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है। इसके चलते भारत जैसे आयात निर्भर देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की इस अस्थिरता के दौरान गुणवत्तापूर्ण शेयरों पर ध्यान दें। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और फेडरल रिजर्व के रुख पर निर्भर करेगी।


