New Delhi News: भारतीय स्टेट बैंक की एक ताजा रिपोर्ट ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर छह दशमलव छह प्रतिशत रहने का अनुमान है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। रुपया गिरकर पचानवे के पार पहुंच गया है।
भुगतान संतुलन सुधारने के लिए कड़े कदमों की जरूरत
एसबीआई रिसर्च का मानना है कि भुगतान संतुलन को ठीक करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। लगातार गिरते रुपये और महंगे कच्चे तेल के कारण देश की आर्थिक बुनियाद पर बुरा असर पड़ रहा है। बाजार में अनियंत्रित सट्टेबाजी भी रुपये को कमजोर कर रही है। विदेशी मोर्चे पर होने वाले नुकसान को कम करने के लिए संरचनात्मक बदलाव करने की सख्त जरूरत है। सरकार को आयात कम करने और निर्यात बढ़ाने पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य खिसका
अगर डॉलर के मुकाबले रुपया पचानवे के स्तर पर बना रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार कम हो जाएगा। ऐसी स्थिति में भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में साल दो हजार तीस तक का समय लग सकता है। अर्थशास्त्रियों ने इस समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा आर्थिक पैकेज लाने की मांग की है। विदेशों में बसे भारतीयों के लिए विशेष बॉन्ड जारी करना सरकार के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
प्रवासी बॉन्ड निवेशकों के भरोसे को करेगा मजबूत
भारतीय मुद्रा में लगातार होने वाली गिरावट विदेशी निवेशकों का भरोसा तोड़ सकती है। इस अविश्वास को दूर करने के लिए एनआरआई बॉन्ड को आकर्षक बनाना होगा। इन विशेष बॉन्ड को पूंजी वापसी, बेहतर रिटर्न और टैक्स छूट जैसे फायदों के साथ जोड़ना चाहिए। ऐसा करने से विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से बढ़ोतरी होगी। जब देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा होगी, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रुपये की स्थिति को फिर से मजबूत किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री की सलाह और कच्चे तेल का बढ़ता दबाव
हाल ही में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से ईंधन का सही इस्तेमाल करने और सोने की खरीदारी टालने को कहा है। भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरत का अस्सी प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात से पूरा करता है। जब ब्रेंट क्रूड की कीमत सौ डॉलर से ऊपर जाती है, तो परिवहन और बीमा लागत बहुत बढ़ जाती है। इसका सीधा असर आम जनता और देश के व्यापार घाटे पर पड़ता है।
पिछले वित्त वर्ष और चौथी तिमाही के विकास आंकड़े
अर्थव्यवस्था के अन्य पहलुओं पर भी एसबीआई ने अपने अनुमान दिए हैं। वित्त वर्ष दो हजार पच्चीस छब्बीस की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सात दशमलव दो प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है। पूरे वित्त वर्ष दो हजार पच्चीस छब्बीस के लिए यह आंकड़ा सात दशमलव पांच प्रतिशत रह सकता है। विकास की यह गति भारतीय बाजार को कुछ सहारा दे सकती है। लेकिन महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता विकास दर के सामने एक बड़ी चुनौती है।
रिजर्व बैंक का अनुमान और एनएसओ की आगामी रिपोर्ट
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में कुछ अलग आंकड़े पेश किए हैं। केंद्रीय बैंक ने आगामी वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर छह दशमलव नौ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। अब सभी की निगाहें राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय पर टिकी हैं। यह कार्यालय उनतीस मई को पिछले वित्त वर्ष के अस्थायी आर्थिक आंकड़े जारी करेगा। इन आंकड़ों से देश की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर और भविष्य की आर्थिक दिशा का सही अनुमान लगेगा।


