ईरान के शांति प्रस्ताव पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, क्या अब फिर शुरू होगी विनाशकारी जंग?

Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्धविराम को बेहद कमजोर और नाजुक बताया है। उन्होंने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं और अमेरिका को इस संघर्ष में पूरी जीत मिलेगी। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है और वैश्विक शांति पर खतरा मंडराने लगा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने ईरान के शांति प्रस्ताव को बकवास करार देते हुए कहा कि यह अपनी सबसे कमजोर स्थिति में है। ट्रंप के अनुसार ईरान को लगता है कि अमेरिका इस युद्ध से थक जाएगा, लेकिन उन्होंने इसे गलतफहमी बताया। राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि वह न तो थकेंगे और न ही ऊबेंगे। उनका पूरा ध्यान केवल निर्णायक जीत हासिल करने पर है।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहराया संकट

ईरान के साथ जारी इस भीषण युद्ध ने दुनिया भर में तेल और ईंधन की भारी किल्लत पैदा कर दी है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष ने समुद्री व्यापारिक मार्गों को लगभग ठप कर दिया है। रविवार को मिले ईरानी प्रस्ताव से युद्ध समाप्त होने की हल्की उम्मीद जगी थी। हालांकि, ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस प्रस्ताव को नापसंद करते हुए इसे नामंजूर कर दिया। इस फैसले ने ईंधन की कीमतों को लेकर वैश्विक चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है।

अमेरिका और इजराइल के बीच शुरू हुआ यह तनाव 8 अप्रैल से अस्थायी रूप से थमा हुआ है। दोनों पक्षों ने पहले युद्धविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन स्थायी समाधान अब भी कोसों दूर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने का ठोस वादा करे। इसके बदले में ही ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंध हटाए जाएंगे और उसकी जब्त संपत्ति को जारी किया जाएगा। फिलहाल दोनों देश अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी बनी चुनौती

शांति वार्ताओं में सबसे बड़ा पेंच होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी को हटाना है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की कुल कच्चे तेल की आपूर्ति के पांचवें हिस्से के लिए जीवन रेखा माना जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध के कारण यह मार्ग असुरक्षित बना हुआ है। जब तक इस महत्वपूर्ण मार्ग पर नाकाबंदी नहीं हटती, तब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आना नामुमकिन है। भारत सहित कई विकासशील देश इस संकट से प्रभावित हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की ‘फर्स्ट अमेरिका’ नीति के कारण वार्ता की मेज पर शर्तों को बहुत कड़ा रखा गया है। ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए प्रतिबंधों से तत्काल राहत चाहता है। वहीं, ट्रंप प्रशासन बिना किसी गारंटी के कोई भी ढील देने को तैयार नहीं है। राष्ट्रपति का आक्रामक रुख यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में कूटनीति की जगह सैन्य विकल्प फिर से हावी हो सकते हैं। दुनिया की नजरें अब ईरान की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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